Pilibhit News: फसलें शारदा नदी में समाईं, किसान मजदूरी को मजबूर

गांव चंदिया हजारा के समीप कटान करती नदी । स्त्रोत -बाढ़ पीड़ित
पूरनपुर। शारदा नदी के कटान में चंदिया हजारा के 52 किसानों की जमीन नदी में समा गई है। इससे उनके सामने परिवार के भरणपोषण का संकट पैदा हो गया है। इनमें से कई किसान भूमिहीन होने पर परिवार पालने के लिए मजदूरी करने लगे हैं।
बांग्लादेश से वर्ष 1971 में विस्थापित होकर आए 525 परिवारों को पुनर्वासन योजना के तहत चंदिया हजारा और इसके आसपास बसाया गया था। इनमें से 300 परिवारों को तीन-तीन एकड़ और 225 परिवारों को ढाई-ढाई एकड़ जमीन दी गई थी। इस पर इन परिवारोंं ने खेती करनी शुरू की। कड़ी मेहनत कर इस जमीन को उपजाऊ बनाया। वर्षाकाल में शारदा नदी के उफनाने पर पहले चंदिया हजारा गांव बाढ़ से घिरता तो था, लेकिन नदी और गांव के बीच जंगल होने से कटान नहीं होता था।
धीरे-धीरे जंंगल का सफाया हुआ तो अब नदी गांव में भारी तबाही मचाती है। तेजी से कटान कर फसलों को लील लेती है। गांव के लोग कई सालों से कटान रोकने के लिए स्थायी उपाय करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। नदी ने दो महीने में चंदिया हजारा के 52 परिवारों की कृषि भूमि निगल ली है। इनमें से कई परिवार अब पेट भरने के लिए मजदूरी कर रहे हैं।
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राजस्व अभिलेखों में किसानों के नाम दर्ज नहीं है जमीन
पुनर्वासन योजना के तहत मिली जमीन राजस्व अभिलेखों में आज तक दर्ज नहीं है। जिस जमीन पर किसान खेती कर रहे हैं, वह अब भी नॉन जेडए और वन विभाग के नाम दर्ज है। जमीन को राजस्व अभिलेखों में अपने नाम दर्ज कराने के लिए चंदिया हजारा के लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। करीब पांच साल पहले मंडलायुक्त के गांव आने पर किसानों ने यह समस्या उनसे सामने रखी थी। तब मंडलायुक्त के निर्देश पर टीमों का गठन भी किया गया था, लेकिन बाद में मामला ठंडा पड़ गया।
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शारदा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव की वजह से सर्वे का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। कटान, बाढ़ से नुकसान का सर्वे करने के लिए टीमें लगाई गई हैं। पीड़ितों और नुकसान की सूची तैयार कराकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। अफसरों के निर्देशानुसार मुआवजा दिलाया जाएगा। – हबीब उर रहमान अंसारी, तहसीलदार
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फोटो १५ पीबीटीपी १८
पुनर्वास योजना के तहत मिली तीन एकड़ जमीन पर गन्ने की फसल की थी, जो नदी में समा गई है। अब परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा, इसकी चिंता सता रही है। मजदूरी करने के लिए बाहर जाने का मन बना रहा हूं। – शिव प्रसाद
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फोटो १५ पीबीटीपी १९
पूरा परिवार तीन एकड़ जमीन के सहारे ही पल रहा था। इसके अलावा आय का कोई और साधन नहीं है। इस बार सारी जमीन नदी में समा गई है। परिवार के पालन-पोषण के लिए अब मजदूरी करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। – विधान मंडल
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फोटो १५ पीबीटीपी २०
नदी का किनारा होने के चलते जमीन पर गन्ने की फसल ही होती है। ढाई एकड़ जमीन पर गन्ना बोया था। दो महीने बाद फसल तैयार होने पर कई सपने संजो रखे थे, जो फसल के नदी में समाने से बिखर गए हैं। अब वृंदावन को मजदूरी करने जाने की तैयारी कर रहा हूं। – तपन विश्वास
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फोटो १५ पीबीटीपी २१
कम जमीन होने से वैसे ही परिवार का पालन पोषण मुश्किल से हो पाता था। अब तो सारी जमीन ही नदी ने निगल ली है। अब कैसे दो वक्त की रोटी का बंदोबस्त होगा, इसकी चिंता है। मजबूरी में मजदूरी करने के अलावा कोई और चारा नहीं है। – विशाल हलधर

गांव चंदिया हजारा के समीप कटान करती नदी । स्त्रोत -बाढ़ पीड़ित

गांव चंदिया हजारा के समीप कटान करती नदी । स्त्रोत -बाढ़ पीड़ित

गांव चंदिया हजारा के समीप कटान करती नदी । स्त्रोत -बाढ़ पीड़ित

गांव चंदिया हजारा के समीप कटान करती नदी । स्त्रोत -बाढ़ पीड़ित



