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Pilibhit News: अतिक्रमण घटा रहा वनक्षेत्र, बाघ बाहर आने के लिए मजबूर

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अतिक्रमण घटा रहा वनक्षेत्र, बाघ बाहर आने के लिए मजबूर

– शारदा नदी के पार कोर जोन के एक हजार एकड़ से अधिक जमीन पर है कब्जा

संवाद न्यूज एजेंसी

कलीनगर। बाघ और तेंदुए की बढ़ती संख्या के बीच जंगल सिकुड़ता जा रहा है। बराही रेंज के जंगल की करीब एक हजार एकड़ जमीन पर कब्जा है। कई सालों से दबंगों ने जमीन पर कब्जा कर रखा है। जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए कई बार रणनीति बनी, लेकिन अभियान कागजों में ही सिमट कर रह गया। एक हजार एकड़ जमीन अगर वन विभाग को वापस मिल जाए तो वन्यजीवों के लिए काफी मुफीद होगा। कब्जे के पीछे वन विभाग के अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध है।

पीलीभीत के जंगलों को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिले दस साल बीत गए। प्राकृतिक वातावरण के साथ बेहतर संरक्षण से वन्यजीवों की संख्या भी बढ़ने लगी। पर्याप्त ग्रासलैंड और पानी की व्यवस्था होने से तृणभोजी वन्यजीवों का कुनबा बढ़ा। इसका सबसे अधिक फायदा बाघ और तेंदुए पर पड़ा। भोजन की कमी न होने से बाघ और तेंदुए की संख्या बढ़ती गई। वर्तमान में पीटीआर के आंकड़ों के अनुसार सौ से अधिक तेंदुए और 71 बाघ हैं। बढ़ती संख्या से सबसे अधिक समस्या मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने में आ रही है। एक माह में तीन इंसानों की जान जा चुकी है

सिकुड़ते दायरे के पीछे जंगल की कोर जोन की जमीन पर अतिक्रमण सबसे अहम वजह बना हुआ है। बराही रेंज के शारदा नदी के पार तीन ग्राम पंचायत की सीमा में एक हजार एकड़ से अधिक जमीन पर अवैध कब्जे हैं। यह कब्जे दशकों से टाइगर रिजर्व प्रशासन के लिए चुनौती बने हुए हैं। वन मंत्री भी पीटीआर की जमीन कब्जे को लेकर बढ़ी कार्रवाई करने की बात कह चुके हैं।

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कई बार बनी रणनीति लेकिन धरातल पर नहीं उतरी

कोर जोन के अतिक्रमण को छुड़ाने के लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने कई बार रणनीति बनाई। राजस्व विभाग के साथ संयुक्त सीमांकन भी किए, लेकिन कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। कुछ कब्जेदारों ने कोर्ट की शरण भी ले ली। स्थित यह है कि हर साल कब्जे का दायरा बढ़ता जा रहा है। जो क्षेत्रीय वनकर्मी के लिए कमाई का जरिया भी बना हुआ है।

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हाथियों का कारिडोर रहा है कब्जे का क्षेत्र

बराही रेंज के जिस कोर जोन के एरिए में अवैध कब्जे हैं वहां कभी विशाल जंगल होता था। यह इलाका हाथियों का कारिडोर भी कहलाता है। जंगल नष्ट होने के बाद कारिडोर भी खत्म हो गया, इससे हाथी भी भटकने लगे। पूर्व में कई बार हाथी रास्ता भटककर रामपुर तक पहुंच चुके हैं।

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पीटीआर की जमीन को कब्जा मुक्त कराने को लेकर विभागीय प्रयास जारी हैं। नए अतिक्रमण न हो सके। इसके लिए सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं। – नवीन खंडेलवाल डिप्टी डायरेक्टर पीटीआर


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