Pilibhit News: न्यूरिया में छह माह में पांच ग्रामीण बने बाघ का शिकार
आबादी वाले इलाकों में बाघ की घुसपैठ रोकने के लिए वन विभाग के पास नहीं है कोई कार्ययोजना
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। न्यूरिया क्षेत्र के अंतर्गत जनवरी माह से जंगल से बाहर खेतों में बाघों की सक्रियता बढ़ी है। नौ जनवरी को बाघ के हमले की पहली घटना हुई थी। इसके बाद से छह माह में पांच लोग बाघ का शिकार बन चुके हैं। इसमें से दो घटनाएं जंगल के अंदर हुईं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाघ के साथ एक बाघिन लगातार क्षेत्र में घूमकर ग्रामीणों पर हमलावर हो रही है। बावजूद इसके वन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है। वर्ष 2020 की गणना के अनुसार पीटीआर में 65 बाघ हैं। इसके चलते जंगल और उसके बाहर के इलाके में बाघों की सक्रियता अधिक बढ़ी है। बाघों के बढ़ने से जंगल से सटे इलाकों के लोग परेशान हैं। वजह यह है कि वन विभाग व पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अफसर ऐसी कोई कार्ययोजना नहीं बना सके जिससे बाघ जंगल से बाहर आबादी वाले क्षेत्र में न आ सकें।
यहां सबसे अधिक परेशानी अमरिया तहसील क्षेत्र में रहती है। छह माह से न्यूरिया क्षेत्र में बाघों की चहलकदमी बढ़ी है। दिसंबर माह में भरतपुर कॉलोनी निवासी परितोष हलदर को गन्ने के खेत में बाघ ने मार डाला था तो आठ जनवरी की रात न्यूरिया क्षेत्र के टांडा बिजैसी निवासी राजमिस्त्री गोकुल मलिक को गांव के निकट बाघ ने मार डाला ।
28 जनवरी को न्यूरिया के गांव घेरा निवासी केवल सिंह को उत्तराखंड की सीमा में जंगल के नजदीक बाघ ने हमला कर मार डाला तो 19 मार्च को उत्तराखंड की सीमा में गन्ने की छिलाई करते समय जोशी कॉलोनी निवासी रमेश मंडल को बाघ ने मार डाला, और अब सोमवार रात अलीगंज बरी निवासी अशोक कुमार की बाघ ने जान लेली।
वन विभाग के अफसरों के रवैए को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश
अलीगंज बरी गांव में घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि न्यूरिया क्षेत्र में लगातार घटनाएं हो रही हैं। पूर्व में भी जंगल के बाहर दो लोगों को बाघ ने मार डाला। इसके बावजूद अफसर शांत बैठे हैं। एक के बाद एक घटनाएं हो रही हैं पर वन विभाग के अफसर खामोश हैं। अफसरों को बाघ को पकड़ने के लिए कदम उठाने चाहिए। जंगल की सीमा पर तार फेंसिंग होनी चाहिए। अफसर हर बार आते हैं और महज वादे करके चले जाते हैं। मंगलवार को भी इसी मुद्दे पर डीएफओ संजीव कुमार से ग्रामीणों की नोकझोंक हुई।
डीएफओ बोले-निगरानी के लिए बढ़ाए जाएंगे कैमरेग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए अफसरों ने एक बार फिर तार फेंसिंग के लिए शासन स्तर पर पत्राचार करने की बात कही है। इसके साथ ही डीएफओ संजीव कुमार ने निगरानी के लिए कैमरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि तीन से अधिक टीमें बाघ पर लगातार नजर रखेंगी।