Pilibhit News: चंदिया हजारा इलाके के लिए अभिशाप बन चुकी है बाढ़

उमापति मंडल ।
पूरनपुर। शारदा नदी के तटवर्ती गांवों के लोग बाढ़ की वजह से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव चंदिया हजारा, राहुलनगर, कॉलोनी नंबर छह ढाई महीने में 12 बार बाढ़ से घिर चुके हैं। वर्षाकाल में शारदा नदी कब उफना जाए और कब घरों में पानी भर जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। घरों में पानी भरने पर घर में चूल्हे तक नहीं जल पाते हैं।
चंदिया हजारा गांव में वैसे तो सालों से बाढ़ आती है, लेकिन चार साल से नदी के रुख बदलने से गांव चंदिया हजारा, राहलनगर, कॉलोनी नंबर छह में भारी तबाही हो रही है। इन गांवों में अधिकांश घर कच्चे होने से पानी भरने पर उनके गिरने का डर बना रहता है। बाढ़ आने पर लोगों को पानी से होकर ही आवागमन करना पड़ता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। बीमार लोगों को इलाज के लिए ले जाना भी मुश्किल होता है। हर समय जान पर बनी रहती है।
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बाढ़ से अब क्षेत्र में रहना खासा कष्टदायी साबित हो रहा है। अफसर, नेता मदद के नाम पर फोटो खिंचवाने के लिए पहुंचते हैं। सालों से इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। – उमापति मंडल
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बाढ़ की चिंता पूरे साल सताती रहती है। बारिश नजदीक आने पर लोग घरों का कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर रखने और खाने-पीने के इंतजाम में जुट जाते हैं। आम लोगों के साथ बच्चों के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। – शंकर मंडल
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जंगल किनारे का क्षेत्र होने से अधिकांश लोग गन्ना, हल्दी, परवल, धान आदि की खेती करते हैं। बाढ़ आने पर लहलहाती फसलें नदी में समा जाती हैं। कई लोगों की तो जमीन ही नदी में समा गई है। – कमलेश राय
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बाढ़ की स्थिति में कई दिनों तक खाना न बनने पर भूखा रहना पड़ता है। अनहोनी की आशंका में रात को सो भी नहीं पाते हैं। कब पानी ज्यादा बढ़ जाए और जान जोखिम में पड़ जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। – विश्वजीत राय

उमापति मंडल ।

उमापति मंडल ।

उमापति मंडल ।