Pilibhit News: कागजों पर संरक्षण… जमींदोज होने के कगार पर ऐतिहासिक धरोहरें

शहर का बरेली गेट । संवाद
अनूप शुक्ला
पीलीभीत। पीलीभीत शहर के पहचान यहां के प्राचीन दरवाजों से है। 17वीं शताब्दी में रुहेलों के शासनकाल में बनाए गए चार दरवाजों में से दो ध्वस्त हो चुके हैं। बाकी दो का संरक्षण कागजों पर चल रहा है। लिहाजा वे भी ध्वस्त होने के कगार पर हैं। नगर पालिका परिषद प्रशासन ने आज तक इनकी सुध नहीं ली है। अगर इन दरवाजों को नहीं सहेजा गया तो शहर के यह ऐतिहासिक दस्तावेज समाप्त हो जाएंगे।
शहर की पहचान के तौर पर 1734 ई. में अली मुहम्मद खान ने सुरक्षा के लिहाज से चार द्वार, पश्चिम में बरेली दरवाजा, पूर्व में हुसैनी दरवाजा, उत्तर में जहानाबादी दरवाजा और दक्षिण में दखिनी दरवाजा बनवाए थे। इन दरवाजों से ही शहर की पहचान बनी। इनमें से हुसैनी और जहानाबादी दरवाजा ध्वस्त हो चुके हैं। आजादी के बाद इन गेटों में सरकारी कार्यालयोंं के अलावा पुलिस चौकी भी संचालित होती थी।
धीरे-धीरे इन ऐतिहासिक इमारतों की हालत देखरेख के अभाव में दयनीय होती चली गई। इनके संरक्षण को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया। देखरेख के अभाव में मौजूदा समय में गेट काफी जर्जर हो चुके हैं और अपनी पहचान खोने लगे है। कहने को तो देखरेख का जिम्मा नगर पालिका परिषद का है, लेकिन कागजों पर ही संरक्षण हो रहा है।
नगर पालिका परिषद प्रशासन का काम इन दरवाजों में संचालित दुकानों से किराया वसूलने तक ही सीमित है। पुरातत्व विभाग भी इन ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के लिए अभी पत्राचार में ही उलझा है। अगर इन गेटों को अब भी नहीं सहेजा गया तो शहर की यह मुख्य पहचान अपना अस्तित्व ही खो देगी। (संवाद)
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साल 1999 में धराशाई को गया था बरेली गेट का ऊपरी हिस्सा
बरेली गेट भी देखरेख के अभाव में जर्जर हालत में पहुंच गया है। यहां दूसरी मंजिल पर बहुत पहले पुलिस चौकी संचालित होती थी। जर्जर भवन को ठीक कराने की पूर्व में मांग भी की गई थी। उस दौरान थोड़ा बहुत काम कराया भी गया था। इसके बाद दूसरी मंजिल का भवन अचानक गिर गया। तब से ऐसा ही है। इसके नीचे दुकान लगाने वालों को भी अब खतरा बढ़ गया है। अभी कुछ माह पहले ही नगर पालिका ने एक गुंबद को गिरवाया था। यह लटक गया था। इसके बाद भी शेष जर्जर और गिरताऊ हिस्से को पालिका की ओर से ठीक नहीं कराया गया है। गेट की हालत ऐसी है कि अभी चार दिन पहले ही कांवड़ यात्रा में बज रहे डीजे की धमक से ईंटे गिर गईं थीं।
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सुंदरीकरण के नाम पर लगाई गईं महज लाइटें
वर्ष 2021 में तत्कालीन डीएम पुलकित खरे ने इनकी सुध ली थी। तब नगर पालिका की ओर से सुंदरीकरण कराने की कवायद शुरू की गई थी। सदर विधायक संजय गंगवार ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन सुंदरीकरण के नाम पर सिर्फ लाइटें लगाकर काम बंद कर दिया गया। तब से अभी तक न तो प्रशासन और न ही नगर पालिका ने कोई ध्यान दिया है।
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सामाजिक कार्यकर्ता ने संरक्षण का उठाया है बीड़ा
बरहा कॉलोनी के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप ने शहर की इन ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए अब प्रयास शुरू किया है। उन्होंने पुरातत्व विभाग के निदेशक को इस बाबत 15 जून को पत्र भेजा था। इसमें कहा था रुहेला सरदार हाफिज रहमत खां की पीलीभीत राजधानी रही है। इसके अलावा लौह सभ्यता एवं छिंदा राजवंश के 10वीं शताब्दी के तमाम शिलालेख मौजूद है। इन तमाम धरोहरों को राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया जाए। इस पत्र के बाद लखनऊ से आई टीम ने जांच पड़ताल की थी। इसके बाद उत्खनन एवं अन्वेषण अधिकारी राम विनय ने कहा था कि बरेली दरवाजा और दखिनी दरवाजा को उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग परामर्शदात्री समिति की अगली बैठक में राष्ट्रीय संरक्षण में लिया जाना प्रस्तावित है।

शहर का बरेली गेट । संवाद

शहर का बरेली गेट । संवाद

शहर का बरेली गेट । संवाद

शहर का बरेली गेट । संवाद

शहर का बरेली गेट । संवाद

शहर का बरेली गेट । संवाद



