Pilibhit News: टिनशेड में चल रहा खाईखेड़ा का गोआश्रय स्थल, चहारदीवारी नहीं

गांव मोहनपुर का गोआश्रय स्थल ।
न्यूरिया। मरौरी ब्लॉक के गांव मोहनपुर में संचालित गोआश्रय स्थल में भूसा सुरक्षित करने के लिए कमरा नहीं है। जंगल से सटा होने के कारण सुरक्षा को लेकर भी कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां पर टिनशेड के नीचे 74 पशुओं के लिए चहारदीवारी का भी अभाव है। यहां हमेशा बाघ के आने की आशंका बनी रहती है।
गांवों में मनरेगा के तहत गोआश्रय स्थलों का संचालन होता है। यहां पर पशुओं की देखभाल और सुरक्षा के लिए चौकीदार के साथ ही केयरटेकर रखे जाते हैं। गांव खाईखेडा के गोआश्रय स्थल में चौकीदार के साथ केयरटेकर भी हैं, लेकिन पशुओं की सुरक्षा को लेकर खास बंदोबस्त नहीं है। यहां पर खुले में ही पशु बांधे जा रहे हैं।
गोआश्रय स्थल जंगल से महज डेढ़ किलोमीटर दूर होने के बाद भी चहारदीवारी को नहीं बनाया गया है। ऐसे में पशुओं के साथ ही वहां मौजूद स्टाफ को वन्यजीवों को लेकर खतरा बना रहता है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा को लेकर कंटीले तारों को चारों ओर लगाया जाता है। गोआश्रय स्थल में भूसा को रखने के लिए भी सुरक्षित ठिकाना नहीं है।
तालाब का पानी पीते हैं पशु
खाईखेड़ा स्थिति गोआश्रय स्थल में वैसे तो पशुओं को पानी पिलाने के लिए मोटर लगी हुई है। जो कि सोलर से चलती है अथवा बिजली से। बिजली न होने या फिर मोटर खराब होने पर वहां बने तालाब का प्रयोग किया जाता है। तालाब की भी सफाई नहीं की जाती है।
क्या बोले सीवीओ
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद कुमार का कहना है कि गोआश्रय स्थल का संचालन मनरेगा के तहत होता है। चहारदीवारी का निर्माण नहीं कराया जाता है। सुरक्षा को लेकर कांटे वाले तारों को लगाया जाता है।