Pilibhit News: शिक्षक ही नहीं, कैसे बनें आचार्य और शास्त्री
पीलीभीत। शहर के श्री दुग्धेश्वर संस्कृत माध्यमिक विद्यालय एवं महाविद्यालय में छात्रों के लिए बेहतर व्यवस्था की गई है। इसके बाद भी छात्र आचार्य और शास्त्री नहीं बन पा रहे हैं। कारण है कि यहां पर लंबे अरसे से शिक्षकों की कमी है। यहां अध्यनरत 26 छात्रों को पढ़ाने के लिए महज एक शिक्षक है। उनके पास ही प्राचार्य की भी जिम्मेदारी है।
सरकार भारतीय संस्कृति को आगे लाने और लोगों को वेद पुराण की शिक्षा के लिए प्रेरित कर रही है। इसके लिए संस्कृत विद्यालयों को खासा महत्व दिया जा रहा है। जिले सस्कृत की शिक्षा के लिए शहर में भी वर्ष 1953 में श्री दुग्धेश्वर महाविद्यालय एवं माध्यमिक विद्यालय खुला। यहां पर भी छात्रों के रहने की पूरी व्यवस्था है तो बैठने के लिए फर्नीचर भी है। इतनी सुविधाएं होने के बाद भी कॉलेज में शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही है। यहां सात शिक्षको के सापेक्ष मात्र एक प्राचार्य की तैैनात है। वही छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं।
संस्कृत से मिलते हैं रोजगार के तमाम अवसर
संस्कृत महाविद्यालय में बीए में आचार्य और एमए में शास्त्री की डिग्री यहां से दी जाती है। यह दोनों डिग्री लोगों के लिए रोजगार के सुनहरे अवसर भी लाती है। फौज के अलावा अन्य विभागों में आचार्य और शास्त्री के पदों पर भर्ती की जाती है। इसके लिए शासन की ओर से वेतन भी अच्छा दिया जाता है। सरकार की ओर से भी इन डिग्री धारकों के लिए विभागों में खासे अवसर दिए जाते हैं।
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महाविद्यालय में ये हैं विषय
शहर के कॉलेज में कक्षा 6 से 10 तक के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से मान्य सभी विषय है। कक्षा 11 से 12 तक में मानविकी वर्ग के सभी विषय यूपी बोर्ड है। इसके अलावा कक्षा 9 से 12 तक पालि, प्राकृत, नेपाली, संगीत कर्मकांड, पारोहित्य, वास्तुशास्त्र, योग विज्ञान, इतिहास, पुराण एवं संस्कृति, ज्योतिष तुलनात्मक दर्शन है। इसके अलावा बीए शास्त्री में संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, भूगोल, गृहविज्ञान विषय है। एमए आचार्य में साहित्य, व्याकरण विषय है। सभी कक्षाओं के लिए संस्कृत को अनिवार्य किया गया है।
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छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा
कॉलेज में छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा भी दी गई है। यहां पर कमरे में एक तख्त और पंखा के साथ अलमारी भी छात्र को दी जाती है।
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कॉलेज में इस समय 26 छात्र पढ़ रहे है जो कक्षा छह से दस तक है। वह मात्र अकेले यहां पर तैनात है। कॉलेज में उनको मिलाकर सात शिक्षकों की जरुरत है। इसके अलावा एक चतुर्थश्रेणी कर्मी होना है। छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।- डॉ. तोहत्तरपाल, प्राचार्य