पीलीभीत

Pilibhit News: भूख और बीमारी से गोवंश की मौत पर पंचायत सचिव निलंबित

Connect News 24

Panchayat Secretary suspended over death of cattle due to hunger and disease

प्रका​शित खबर ।

कलीनगर। गोमती उद्गम स्थल की पवित्र भूमि के पास परशुरामपुर गोआश्रय स्थल में भूख और बीमारी से एक के बाद एक गोवंश की मौत होती गई। अमर उजाला ने जब जिम्मेदारों की लापरवाही का खुलासा किया तो प्रशासन अपनी गर्दन बचाने के लिए सच पर पर्दा डालने में जुट गया। मामला जब शासन तक पहुंचा और जांच कराई गई तब लापरवाही की परतें खुलती चली गईं।

जांच में पता चला कि ग्राम पंचायत सचिव की ओर से पशुओं के चारे आदि के लिए बजट ही नहीं मांगा गया। लिहाजा भूख से तड़प कर गोवंश ने एक के बाद एक दम तोड़ दिया। अब जब सच्चाई सामने आई तो अधिकारियों ने सचिव को दोषी पाते हुए उसे निलंबित कर दिया है। जबकि मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

जिले में संचालित को आश्रय स्थलों में गोवंश की जो दशा है वह किसी से छिपी नहीं है। शासन स्तर से टीम आने के बाद ही अधिकारी पशुओं की चिंता में जुटते हैं, ताकि निरीक्षण के दौरान लापरवाही की पोल न खुल सके। अगस्त माह में अमर उजाला ने कलीनगर के परशुराम गोआश्रय स्थल का मामला उठाया। यहां भूख प्यास से लगातार गोवंश की मौत हो रही थी। एक महीने में करीब 18 पशु मर गए।

मौत को छुपाने के लिए स्थानीय स्तर पर गोआश्रय स्थल पर ही पशुओं दफना दिया गया। स्थानीय प्रशासन तो मामले को दबाने में जुटा रहा। एक-एक करके रोजाना हो रही मौत का मामला शासन तक पहुंचा। जांच में पशुओं के मरने की पुष्टि भी हुई। एसडीएम ने जब मौके पर जाकर जांच की तो सचिव की लापरवाही पाई। यही नहीं सचिव की ओर से पशुओं के चारा व भूसा के लिए भी बजट की मांग तय समय पर नहीं की गई थी।

मामला शासन तक जा पहुंचा है और अब अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में जुट गए हैं। इसके बाद जिला विकास अधिकारी हवलदार सिंह ने पंचायत सचिव धर्मेंद्र कुमार को दोषी मानते हुए उसे निलंबित कर दिया। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी पर भी गाज गिरना तय है।

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सब कुछ जान रहे थे अधिकारी, कर ली आंखें बंद

गोआश्रय स्थल में एक के बाद एक गोवंश दम तोड़ रहे थे। घटना अखबार की सुर्खियां बनी तो अधिकारियों ने खबर का ही खंडन करना शुरू कर दिया। सच्चाई को छिपाने के लिए पत्रकारों के गोआश्रय स्थल में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। हद तो यह हो गई कि हालात सुधारने के बजाय स्थानीय अधिकारियों ने गोवंश की मौत की घटनाओं को छिपाने में पूरी ताकत झोंक दी। एक के बाद एक गोवंश दम तोड़ रहे थे लेकिन सीडीओ ने गोआश्रय स्थल जाने की जहमत नहीं उठाई। अब मामला शासन तक पहुंचा है तो नीचे वालाें पर कार्रवाई कर अपनी गर्दन बचाई जा रही है।

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