Pilibhit News: आतंकियों की बर्बरता के 90 के दशक के चश्मदीदों का तलाशा रिकॉर्ड
पूरनपुर। खालिस्तान की मांग को लेकर 90 के दशक में पीलीभीत आतंकवादियों की पनाहगाह बन गया था। कब किस फार्मर के घर आतंकवादी पहुंच जाएं, इसे लेकर लोग दहशत में रहते थे। पनाह न देने वालों पर आतंकियों का कहर बरपता था। पनाह देने की भनक लगने पर पुलिस, प्रशासन की मार खानी पड़ती थी। आतंकवाद के दौरान हुईं बड़ी घटनाओं के गवाहों और आतंकवादियों के नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाने के लिए एटीएस की टीम मंगलवार को दूसरे दिन भी रिकॉर्ड खंगालती रही।
जिले में 1989 से आतंकवाद की शुरुआत हुई थी। 90 के दशक में आतंकवाद चरम पर पहुंच गया था। सरेशाम अपहरण, हत्या, फिरौती के लिए अपहरण हुआ करते थे। शाम होते ही क्षेत्र में सन्नाटा पसर जाता था। पुलिस भी थाने से बाहर निकलने से कतराती थी। 1991 में आतंकवादियों ने माधोटांडा थाना क्षेत्र में मूसेपुर के जंगल में पूरनपुर कोतवाल जितेंद्र सिंह यादव की उस समय गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी, जब वे आतंकियों की सूचना पर टीम लेकर जंगल मेंं कांबिंग करने पहुंचे थे।
जुलाई 1991 में दियोरिया के जंगल में छिपे आतंकवादियों ने कटरुआ बीनने पहुंचे गांव घुंघचाई और शिवनगर के 29 लोगों को पकड़ लिया था। मुखबिरी के शक में इन सभी को लाइन में खड़ाकर गोलियों से भून दिया गया था। 90 के दशक में ही सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गांव नजीरगंज में आतंकवादियों ने सर्वजीत सिंह और उनके दो बेटों को मौत के घाट उतार दिया था। असम हाईवे पर गांव उदय करनपुर के समीप प्राइवेट बस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। इसमें नगर के एक डॉक्टर के भाई की मौत हो गई थी, जबकि कई यात्री घायल हो गए थे।
नगर निवासी राइस मिलर बृजेश गुप्ता और एक डॉक्टर के भाई सुधांशु अग्रवाल का आतंकवादियों ने फिरौती के लिए दिनदहाड़े अपहरण कर लिया था। नगर के माधोटांडा रेलवे क्रॉसिंग के समीप बरेली कॉरपोरेशन की बैंक शाखा मेंं आतंकियों ने दिनदहाड़े लूटपाट की थी। सूचना पर टीम के साथ पहुंचे दरोगा राजेंद्र सिंह ने आतंकियों का मुकाबला किया लेकिन सिपाही मौके से भाग गए थे। इस पर आतंकवादी फायरिंग करते हुए फरार हो गए थे।
०००००
बेहद गोपनीय तरीके से की जा रही जांच-पड़ताल
लखनऊ से सोमवार को नगर में पहुंची एटीएस की टीम मंगलवार को दूसरे दिन भी आतंकवादियों, उनके नेटवर्क, उस वक्त की घटनाओं और उनसे जुड़े गवाहों के बारे में जानकारी जुटाती रही। थाने में कई घंटे टीम ने रिकॉर्ड खंगाला। हालांकि जांच को पूरी तरह गोपनीय रखा जा रहा है। खासतौर से उस दौरान हुई घटनाओं के गवाहों की तलाश में टीम है। जांच को लेकर टीम अधिकारी और पुलिस कुछ भी बताने से इन्कार कर रहे हैं।

