Pilibhit News: पीलीभीत में बांसुरी के सुर साधने के लिए आगे आए प्रयागराज के वैज्ञानिक

शिवम कश्यप ।
पारि पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केंद्र ने कल्याणपुर में लगाई पौध, एक हेक्टेयर में रोपी गई हैं बांस की विभिन्न प्रजातियां
अनूप शुक्ला
पीलीभीत। असम से बांस मंगवाकर जिले में बांसुरी की पहचान देने में जुटे कारीगरों के हाथों को और मजबूत करने और सुर साधने में पारि पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केंद्र प्रयागराज के वैज्ञानिक आगे आए हैं। लंबे पत्राचार के बाद वहां के वैज्ञानिकों ने पीलीभीत आकर पास के गांव कल्याणपुर में बांस की पौध को लगवाया है। वैज्ञानिकों का यह प्रयास यदि सफल होता है तो जिले के बांसुरी उद्योग को पंख लग जाएंगे।
पीलीभीत की बनी बांसुरी देश ही नहीं विदेश में भी अपने सुरों से लोगों को कायल कर चुकी है। प्रदेश सरकार ने भी बांसुरी को एक जिला एक उत्पाद में शामिल किया है। मौजूदा समय में बांसुरी के उद्योग को आगे बढ़ाने में लगे कारीगरों के सामने समस्या खड़ी हो रही है। जिला या फिर प्रदेश में अन्य कहीं बांसुरी के लिए उपयुक्त बांस न होने के कारण धंधा काफी कम हो गया है।
बांसुरी के लिए बांस के पीस असम से मंगवाने पड़ रहे हैं। इसमें काफी खर्च आ रहा है। पूर्व में जिले में ही बांसुरी के लिए बांस का उत्पादन कराने की मांग उठती आई है। जो अब धरातल पर आ गई है। इसके लिए पारि पुनर्स्थापन वन अनुसंधान केंद्र प्रयागराज के वैज्ञानिक आगे आए हैं। प्रयागराज से केंद्र प्रमुख डॉ संजय सिंह के निर्देशन में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक यादव, कनिष्ठ शोध सहायक सान्चिली वर्मा और परियोजना सहायक राहुल निषाद ने अनुसंधान के लिए कल्याणपुर गांव में एक हेक्टेयर में बांस की विभिन्न प्रजातियों का रोपण किया। इसकी देखरेख भी की जा रही है। (संवाद)
शहर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप एडवोकेट ने बांसुरी कारीगरों की समस्या को देखते हुए पारि अनुसंधान केंद्र के प्रमुख डॉ. संजय सिंह से पत्राचार किया था। उन्हें बताया कि जनपद पीलीभीत के एक जिला एक उत्पाद योजना में बांसुरी शामिल है। बावजूद इसके बांस असम से आता है। इस कारण यहां बांसुरी उद्योग प्रभावित हो रहा है। उनका कहना था कि यदि बांस का उत्पादन पीलीभीत में ही अन्य फसलों की भांति होने लगे तो यह जनपद के हित में होगा।

शिवम कश्यप ।



