Pilibhit News: जिले में मिट्टी में घट रही फॉसफोरस और जीवांश कार्बन की मात्रा

लैंब में मिटृटी की जाच करते तकनीशियन ।संवाद
पीलीभीत। फसलों की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की सेहत बेहतर होना जरूरी है, लेकिन दुर्भाग्य है कि जिले की मिट्टी लगातार बीमार होती जा रही है, लेकिन सुधार के कोई खास प्रयास होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। मिट्टी में फॉसफोरस, जीवांश कार्बन आदि पोषक तत्वों में कमी आ रही है। इसका सीधा असर फसलों की पैदावार पर पड़ रहा है।
मिट्टी में पोषक तत्वों के असंतुलित होने की मुख्य वजह अत्यधिक रासायनिक खादों का इस्तेमाल करना है। जागरूकता में कमी के चलते किसान ऐसा करते हैं। मिट्टी की जांच के लिए जिले में तीन प्रयोगशालाएं जिला मुख्यालय, पूरनपुर और बीसलपुर में हैं। सामान्य प्रक्रिया के तहत किसान कहीं भी मिट्टी की जांच करा सकते है, लेकिन ज्यादातर किसानों को इसकी जानकारी ही नहीं है।
मिट्टी की जांच भी दो प्रकार की होती हैं, एक संपूर्ण और दूसरी मुख्य पोषक तत्वों की। संपूर्ण जांच के लिए 102 और मुख्य पोषक तत्वों की जांच के लिए मात्र 29 रुपये किसान को देेने होते हैं। योजनाओं के तहत होने वाली जांचें मुफ्त होती हैं, लेकिन काफी किसानों को मृदा परीक्षण के बारे में जानकारी ही नहीं है। हालांकि विभागीय अफसरों का दावा है कि मृदा परीक्षण के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।
मिट्टी में पोषक तत्वों पर एक नजर
पोषक तत्व सामान्य मात्रा मौजूद मात्रा
जीवांश कार्बन 0.51 से 0.80 0.21 से 0.80 फीसदी
पोटाश- 101-250 101-250 किग्रा/हेक्टेयर
फॉसफोरस 21 से 40 11 से 20 किग्रा/हेक्टेयर
स्टाफ की कमी से दिक्कत
पीलीभीत प्रयोगशाला में स्टाफ काफी कम है। यहां वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप-बी के तीन पद हैं, लेकिन एक ही तैनात है। वहीं प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी के भी तीन पद हैं, लेकिन एक ही तैनात है। लेखा-जोखा के लिए क्लर्क एक भी नहीं है।
खेत से ऐसे लें मिट्टी का नमूना
प्रयोगशाला के प्राविधिक सहायक मोतीराम ने बताया कि खेत के चार से पांच स्थानों पर छह गुणा चार गुणा छह इंच के गड्ढे खोदें। खुरपी से गड्ढों की दीवारों से लगभग 2.5 सेमी पर्त ऊपर से नीचे लें। खेत के विभिन्न गड्ढों से प्राप्त मिट्टी को बर्तन में अच्छी तरह मिला लें और उसको चार हिस्सों में बांट लें। उसमें दो हिस्से फेंक दें और शेष दो हिस्सों को फिर से अच्छी तरह मिला लें और फिर चार भागों में बांट लें। इसी तरह करते जाएं, जब मिट्टी 500 ग्राम बचे तो उसे थैले में भरकर जांच के लिए लाएं। ध्यान रखें कि अगर मिट्टी गीली है तो उसे सुखाकर लाएं।
ऐसे सुधार सकते हैं मिट्टी की सेहत
पहले मिट्टी की जांच कराएं, ताकि पता चल सके कि कौन-कौन से पोषक तत्व कम हैं।
जैविक और संतुलित खाद का इस्तेमाल करें।
समय-समय पर भूमि का सुधार करें।
केंचुए और गोबर की खाद का इस्तेमाल करें।
फसलों के अवशेष को खेत में ही मिलाएं।
वर्जन
मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। गोबर, हरी खाद और अवशेष फसल से मिट्टी के पोषक तत्व पूरे किए जाने का प्रयास विभाग की ओर से लगातार जारी है। – रोहित कुमार वर्मा, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप-ए
वर्जन
मिट्टी में पोषक तत्व कम होने पर पैदावार पर 10 से 15 फीसदी असर पड़ता है। अगर मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा 20 फीसदी से कम है तो पैदावार 10 फीसदी प्रभावित होती है। फॉसफोरस 10 फीसदी से कम है तो पांच फीसदी और पोटाश 15 से 20 फीसदी से कम होने पर पैदावार तीन से चार फीसदी प्रभावित होती है। -डॉ. एसएस ढाका, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक