पीलीभीत

Pilibhit News: छह सालों से ठंडे बस्ते में पड़ी हैं नए रोडवेज बस अड्डे के निर्माण की फाइल

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पुराने बस अड्डे पर सुविधाओं का अभाव, यात्रियों को होती है परेशानी, जिम्मेदारों ने जताई लाचारी

संवाद न्यूज एजेंसी

पीलीभीत। शहर के रोडवेज बस अड्डे पर सुविधाओं के अभाव में यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। यात्रियों के बैठने का इंतजाम तो दूर की बात बारिश में सिर ढकने की जगह भी नहीं मिल पाती। क्योंकि यहां जगह कम है, ऊपर से यहीं वर्कशॉप भी है। नए बस अड्डे की जरूरत को महसूस करते हुए निर्माण का प्रस्ताव 2017 में बनाकर डीएम कार्यालय भेजा गया, लेकिन यह प्रस्ताव फाइलों में ही दबकर रह गया है। एआरएम ने भी दोबारा प्रस्ताव भेजने की जहमत जरूरी नहीं समझा है।

रोडवेज के बेड़े में वर्तमान में 77 बसें हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक प्रतिदिन इन बसों से 10 से 11 हजार यात्री सफर करते हैं, लेकिन यात्रियों को बैठने या बस की प्रतीक्षा करने के लिए शहर में रोडवेज बस अड्डे पर बेहतर इंतजाम नहीं हैं। यात्रियों के लिए सिर्फ दो बेंच मौजूद हैं, जिनपर मुश्किल से आठ-दस यात्री ही बैठ सकते हैं।

स्वयं रोडवेज के स्थानीय जिम्मेदार मानते हैं कि इसकी वजह से यात्रियों का भी बस अड्डे से मोहभंग हो रहा है और सुविधाएं न होने के कारण वे चौराहों पर खड़े होकर बस आने का इंतजार करते हैं। बारिश होने की दशा में बस अड्डे पर छाया का बेहतर प्रबंध भी नहीं हैं, ऐसे में यदि 20-30 यात्री एक साथ आ जाएं तो उन्हें बारिश आने पर दिक्कत होती है।

मुख्यालय पर रोडवेज बस अड्डे का निर्माण कराने की मुहिम वर्ष 2017 के दिसंबर में शुरू हुई। परिवहन निगम ने डीएम कार्यालय को प्रस्ताव संबंधी फाइल भेजी, जो अब स्वयं जिम्मेदारों को नहीं मिल रही है।

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चौराहों पर उतारते सवारी

कुछ रोडवेज के बस चालकों व परिचालकों ने बताया कि नियम के मुताबिक जरूरी है कि सवारियों को बस अड्डे से बस में बैठाया जाए और वहीं उतारा जाए लेकिन बस अड्डे पर सुविधाओं के अभाव में नौगवा पकड़िया चौराहे पर सवारियां उतारनी पड़ रही हैं। ऐसे में कई बार जाम की समस्या का भी सामना करना पड़ता है।

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बोले जिम्मेदार

वर्ष 2017 में प्रस्ताव संबंधी फाइल डीएम कार्यालय भेजी गई थी। बीसलपुर रोड पर जमीन भी चिह्नित कर ली गई लेकिन बीते एक साल से क्या कुछ हुआ इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। इसमें कोई दोराय नहीं कि यात्रियों को दिक्कत हो रही है।

– विजय गंगवार, एआरएम


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