पीलीभीत

Pilibhit News: एक ही परिवार के चार लोगों की साथ उठीं अर्थियां तो गांव में मचा कोहराम

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There was chaos in the village when four members of the same family got together.

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद

पूरनपुर। वाराणसी में बुधवार सुबह हुए सड़क हादसे में मृत सभी आठ लोगों के शव बृहस्पतिवार शाम गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया। एक एंबुलेंस से महेंद्र पाल, उनकी पत्नी चंद्रकली, दामोदर प्रसाद और उनकी पत्नी निर्मला देवी, जबकि दूसरी में विपिन कुमार, उनकी मां गंगा देवी, राजेंद्र यादव, अमन कश्यप के शव आए। एक घर से एक साथ चार अर्थी निकलीं तो हर शख्स के आंखों में आंसू छलक आए।

मुजफ्फरनगर गांव में दोनों भाई महेंद्र पाल व दामोदर पाल और उनकी पत्नियों के शव घर में पास-पास रखे गए। परिजनों और करीबियों के विलाप ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भिगो दीं। अंतिम दर्शन के बाद एक साथ चार शवयात्रा निकलीं तो लोग सिसकने लगे। गांव के पूरब और दक्षिण में महेंद्र और दामोदर के खेत में चारों अर्थी पहुंचीं। यहां दो चिताएं बनाई गईं। एक चिता पर महेंंद्र पाल और उनकी पत्नी चंद्रकली जबकि दूसरी चिता पर दामोदर प्रसाद और उनकी पत्नी निर्मला देवी का अंंतिम संस्कार हुआ। महेंद्र और चंद्रकली को उनके पुत्र अमित और दामोदर और उनकी पत्नी को उनके नौ साल के पुत्र शिवम ने मुखाग्नि दी।

इधर, गांव रूदपुर में विपिन कुमार और उसकी मां गंगादेवी का शव पहुंचने पर कोहराम मच गया। घर में मां-बेटे के शव पास-पास रखे गए। घर से एक साथ दो अर्थी निकलीं। गांव के उत्तर मां और बेटे की पास-पास चिता सजाई गई। दोनों चिताओं को मुखाग्नि विपिन से छोटे भाई सोनू ने मुखाग्नि दी। गांव पिपरिया दुलई में कार चालक अमन कश्यप और गांव धरमंगदपुर में राजेंद्र यादव का शव पहुंचने पर परिजनों और करीबियों में हाहाकार मच गया। अमन कश्यप का अंतिम संस्कार गांव के उत्तर में स्थित श्मशान भूमि में हुआ। मुखाग्नि अमन के पिता अनिल कश्यप ने दी। गांव धरमंगदपुर में राजेंद्र यादव का अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके पुत्र विपिन ने दी।

तू रो मत मां…पापा की जगह मैं रखूंगी तेरा ध्यान

– पिता की अंतिम यात्रा में मां के आंसुओं को पौंछते हुए बोली 12 वर्षीय पुत्री रौनक

फोटो- 37

संवाद न्यूज एजेंसी

कलीनगर। रुद्रपुर गांव में विपिन और गंगा देवी के शव घर पहुंचते ही चीत्कार मच गई। घर के हर तरफ लोगों का हुजूम लग गया। अपनों का चेहरा देख परिजन बदमाश हो गए। पिता को अंतिम विदाई देते समय मां को बदहवास देख 12 वर्षीय पुत्री रौनक खुद की आंखों से बह रहे आंसुओं के बीच मां को हिम्मत देती दिखीं। सिर पर हाथ रखकर बोली मां मत रो, पापा की जगह मैं तुम्हारा ख्याल रखूंगी। रौनक को देख हर किसी की आंखें नम हो गई।

बनारस में हुए सड़क हादसे में विपिन यादव और उसकी मां गंगा देवी की बुधवार सुबह दर्दनाक मौत हो गई थी। बृहस्पतिवार शाम दोनों के शव गांव पहुंचे। भाई विपिन और मां गंगादेवी के शव देख पवन, शिवम, शेखर का रोकर बुरा हाल हो गया। वहीं विपिन का शव देख पत्नी मीना देवी, पुत्री नैन्सी और पुत्र रौनक भी खुद को नहीं संभाल सके। सभी को चीखकर रोते देख हर किसी की आंखें नम हुई। करीब बीस मिनट तक रुकने के बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।

अंतिम विदाई के दौरान विपिन की पत्नी और पुत्री की भी कुछ दूरी तक पीछे चली। बदहवास पत्नी मीना को अन्य महिलाएं संभालें थी। मां की स्थिति को देख साथ में चल रही पुत्री नैंसी ने खुद के साथ मां को संभाला। सिर पर हाथ रखकर बोली मां मत रो पापा की जगह मैं आपका ध्यान रखूंगी। इसके बाद आठ वर्षीय पुत्र रौनक ने अपने पिता की चिंता को मुख्य अग्नि दी। जिसे देख हर किसी की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे।

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद

रुद्रपुर गांव में मा, बेटे के शव घर पहुंचने घर के बाहर लगी भीड़ । संवाद


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