भारत में सज़ा धनकुबेरों का स्कोरूच, सामने आए एलन मस्क और मुकेश अम्बानी, देखें कौन भारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी अमेरिका की यात्रा (पीएम मोदी यूएस ट्रिप) पर हैं और इसी यात्रा के दौरान एक बड़ी जंग की स्क्रिप्ट तैयार हो रही है। अमेरिकी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री की मुलाकात दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (एलोन मस्क) से भी हुई। एलन मस्क ने मुलाकात के बाद बताया कि वह अगले साल भारत आ सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत में मोटरसाइकिल (भारत में टेस्ला) और स्टार लिंक की एंट्री (भारत में स्टारलिंक) के भी संकेत दिए हैं।
स्टार लिंक को लगा है झटका
एलन की कंपनी के लिए भारत का अनुभव अब तक ठीक नहीं है। युवाओं को लेकर लाखों लोग जगजाहिर हैं, लेकिन स्टारलिंक की राहें भी आसान नहीं होने वाली हैं। इसकी झलक सबसे पहले सामने आई है, जब स्टार लिंक ने भारत में भी अपने सैटेलाइट (स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट) सेवा की एडवांस लाइन की शुरुआत की थी। सरकार ने उस समय स्टार लिंक को फ़्लोरिडा को अग्रिम वापसी के लिए कहा था।
भारतीय बाजार में जियो का बिजनेस
अब यही सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस मास्क और भारत और एशिया के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी (मुकेश अंबानी) के बीच मजाक की वजह बन रहा है। भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में अभी मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो (Reliance Jio) का पोर्टफोलियो है। जियो के पास अभी 439 मिलियन मस्कुलर बिल्डर्स हैं, जो भारत में सबसे ज्यादा हैं। इसी तरह के रिश्ते जियो के पास 8 मिलियन ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं, जो बाजार की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
ये है मस्क के स्टार लिंक का लॉजिक
स्टारलिंक को पिछली बार इस कारण झटका लगा था कि वह बिना लाइसेंस के एडवांस कंसल्टेंट के लिए शुरू कर दी गई थी। असली भारत का प्रोटोटाइप बाजार दुनिया से कुछ अलग है। भारत में टेलीकॉम सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी होती है। मस्क की कंपनी स्टारलिंक इस बात के लिए लॉबिंग कर रही है कि भारत सरकार भी ग्लोबल ट्रेंड के अकाउंट से स्पेक्ट्रम की लॉन्चिंग बिना लाइसेंस दे दे। स्टार लिंक का तर्क है कि स्पेक्ट्रम एक प्राकृतिक स्रोत है और इसे सभी कंपनियों को साझा करना चाहिए।
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