Rampur News: एक साल में 56 युवाओं ने छोड़ी पंचायत सहायक की नौकरी
रामपुर। युवाओं को पंचायत सहायक की नौकरी रास नहीं आई। एक-एक करके साल भर के अंदर जिले में 56 पंचायत सहायकाें ने त्याग पत्र दे दिया। अब ये ग्राम पंचायतें पंचायत सहायक विहीन हैं। सहायक की नौकरी में सबसे बड़ी दिक्कत स्थानीय राजनीति की है। अब शासन को दोबारा भर्ती का प्रस्ताव भेजने की तैयारी है।
शासन ने दो साल पहले ग्राम पंचायताें में पंचायत सहायक की भर्ती निकाली थी। पंचायतों में सचिवालय बनाकर वहां कंप्यूटर सिस्टम लगाकर सभी कार्य किए जाने की सुविधा दी गई। पंचायत सहायकों को ही गांवों के कार्यों की ऑनलाइन फीडिंग करना, भुगतान करना, पेंशन फॉर्म ऑनलाइन भेजना आदि कार्यों की जिम्मेदारी थी। पंचायतों में जिस जाति का प्रधान महिला व पुरुष होगा तो उसी वर्ग के युवा को नौकरी दी जानी थी।
पंचायत सहायकों की पंचायत में भर्ती कर दी गई थी, लेकिन दो-चार माह बाद ही पंचायत सहायकों ने नौकरी से त्यागपत्र देने शुरू कर दिए। वह अन्य स्थानों पर नौकरी करने चले गए। कई ने तो दिल्ली की कंपनी में नौकरी ज्वाइन की तो कई दूसरी जगह नौकरी कर रहे हैं। इसी प्रकार एक साल में 56 ग्राम पंचायतें पंचायत सहायकों से खाली हो गईं। अब फिर इनमें भर्ती की तैयारी की जा रही है। जिससे काम प्रभावित न हो।
इंसेट
मानदेय भी है काफी कम
पंचायत सहायकों को कम मानदेय भी नौकरी से त्यागपत्र देने का एक कारण था। सहायकों को साल में 11 महीने छह हजार रुपये ही मानदेय के रूप में मिलते हैं। सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक कार्यालय में रहना पड़ता है। इसलिए युवाओं ने मानदेय कम होने पर त्यागपत्र दिया।
ब्लॉकवार रिक्त पंचायत सहायकों के पद
जिले में सबसे ज्यादा मिलक ब्लॉक की 15 ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों के पद खाली है। इसके अलावा शाहबाद में आठ, बिलासपुर में नौ, सैदनगर में सात और चमरौआ में चार गांवों में पंचायत सहायक नहीं हैं।
बयान
नौकरी छोड़ने के कई कारण हो सकते हैं। फिलहाल पंचायत सहायकों के रिक्त पदों की सूचना ब्लॉकों से मांगी जा रही है। इसके बाद रिक्त पदों पर नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया पूरी कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।