Rampur News: गुरुओं के आशीर्वाद से मिली मंजिल
रामपुर। गुरु की महिमा अनंत है। शिष्य को मंजिल की राह बताने वाला गुरु ही है। यही गुरु-शिष्य की परंपरा का मूल भाव है। गुरु की छोटी सी डांट भी सीख दे जाती है। शिक्षक दिवस के मौके पर जिले के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए गुरु की महिला का बखान किया।
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पिता रहे मेरे पहले गुरु, जीवन के मूल्य बताएं
मेरे जीवन में पिता अंबालाल कलाल ने गुरु की भूमिका निभाई है। गांव के जिस स्कूल में पिताजी हेडमास्टर थे, उस स्कूल में मैंने आठवीं तक पढ़ाई की। पढ़ाई में पिता ने गुरु का धर्म निभाया और पढ़ाई के साथ-साथ जीवन के मूल्यों की सीख देते हुए नैतिकता का पाठ पढ़ाया। आईएएस बनने के सफर में मेरे शिक्षक प्रभु दयाल मिश्रा का भी बड़ा योगदान है।
– नंद किशोर कलाल, मुख्य विकास अधिकारी रामपुर।
शिक्षक ने कराया सही विषय का चुनाव
10वीं में विषय वर्ग को चुनने में मेरे शिक्षक लाखन कुमार मिश्रा ने अहम भूमिका निभाई। उनके बताए मार्गदर्शन के अनुसार मैंने 10वीं व 12वीं में संस्कृत से पढ़ाई कर बेहतर अंक प्राप्त किए थे। उस वक्त मैंने कॉलेज टॉप किया था। मुझे पुरस्कार स्वरूप एक हजार रुपये दिए गए थे। अच्छे अंकों की वजह से मैंने जिला विद्यालय निरीक्षक बनने तक का सफर तय किया। अब जब भी गांव जाना होता है तो गुरुजी से जरूर मिलकर आता हूं।
– मुन्ने अली, जिला विद्यालय निरीक्षक रामपुर।