Rampur News: 34 लीटर केरोसीन के सहारे मच्छरों से जंग लड़ने की तैयारी कर रहा स्वास्थ्य विभाग
रामपुर। डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास केमिकल का संकट है। 34 लीटर केरोसीन के सहारे डेंगू मच्छरों से जंग लड़ने की तैयारी की जा रही है। डेंगू के मच्छरों से बचाव के लिए केरोसीन को मिलाकर एंटी लार्वा का छिड़काव मच्छरों को मारने में किया जाता है।
दरअसल, मच्छर जनित रोग डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग हर साल करोड़ों का बजट फॉगिंग और एंटी लार्वा दवा के छिड़काव के नाम पर खर्च कर देता है। इस साल जुलाई में ही डेंगू के दो मामले आ चुके हैं। चार लोगों को मलेरिया हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग के पास डेंगू से निपटने के लिए संसाधन व केमिकल की पड़ताल की गई तो पता चला कि विभाग के पास केरोसीन और डीजल का संकट है।
इस वक्त 34 लीटर केरोसीन ही उपलब्ध है, जबकि इस पूरे सीजन में मच्छरों से निपटने के लिए विभाग को एक हजार लीटर केरोसिन की आवश्यकता पड़ने वाली है। फॉगिंग के लिए डीजल भी विभाग के पास नहीं है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केरोसीन की पूर्ति के लिए शासन को डिमांड भेजी जाएगी।
हर साल रहता है केरोसीन का संकट केरोसीन की पूर्ति की जिम्मेदारी पूर्ति विभाग के पास है, लेकिन बीते कुछ वर्षों से सरकार ने राशन की दुकानों पर केरोसीन देना बंद कर दिया है। इसलिए पूर्ति विभाग ने केरोसीन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। पिछले वर्ष भी स्वास्थ्य विभाग को केरोसीन नहीं मिल पाया तो शासन से बजट की मांग की गई थी। बजट मिलने पर बरेली से 400 लीटर केरोसीन मंगाया था।
ऐेसे बनता है मिश्रण
एक लीटर मैलॉथियान में 19 लीटर डीजल मिलाकर फॉगिंग कराई जाती है। वहीं एक लीटर पाइरेथ्रिन में 19 लीटर केरोसीन मिलाकर एंटी लार्वा कीटनाशक तैयार किया जाता है। इसका छिड़काव कूलर, फ्रिज की ट्रे, टायर, गमलों, जलभराव वाले स्थानों पर किया जाता है। जिससे कि मच्छर पैदा करने वाले लार्वा को नष्ट किया जा सके।
विभाग के पास केमिकल
-मैलाथियॉन-248 लीटर
-पाइरेथ्रिन -109 लीटर
-केरोसीन-34 लीटर
इस साल के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े
डेंगू
कुल जांच-1144
किट से-496
एलाइजा-648
कुल मामले-00
कुल मौतें-00
मलेरिया
कुल जांच-17357
कुल मामले- 04
कुल मौतें-00
बयान
जहां मामले आते हैं, वहां फॉगिंग एवं एंटी लार्वा दवा का छिड़काव कराया जाता है। केरोसीन की डिमांड शासन को भेजी जा रही है। डीजल खर्च की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत स्तर पर प्रधान और निकायों में चेयरमैन की होती है। वे फॉगिंग के हिसाब से अपने खाते से बजट खर्च कर डीजल मंगाते हैं। अन्य केमिकल विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

