Rampur News: नवाबी दौर में क्रॉस ब्रीड से बना था रामपुर हाउंड
रामपुर। रामपुर हाउंड अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की शान बनेगा। रामपुर के नवाब अहमद अली खान बहादुर ने शिकारी कुत्तों का दल तैयार करते हुए अफगान हाउंड और इंग्लिश ग्रेहाउंड के क्रॉस ब्रीड से स्वदेशी नस्ल तैयार कराई थी, जिसे रामपुर हाउंड नाम दिया। इस नस्ल के कुत्ते शिकार में बड़े माहिर थे, चीते की तरह तेज दौड़ने वाले रामपुर हाउंड को नवाबी दौर में पहचान मिली। इसे रामपुर में ही नहीं, बल्कि दूसरे शहरों में भी अलग पहचान मिली, लेकिन इस नस्ल के कुत्ते अपनी ही जमीन यानी रामपुर से गायब हो चुके हैं। रामपुर में करीब पौने दो सौ साल तक नवाबों का राज रहा। उनके अपने शौक थे। किसी ने आलीशान महल बनवाए तो किसी ने बड़े-बड़े बाग लगवाए। नवाब अहमद अली खान बहादुर शिकार के शौकीन थे। तब रामपुर के आसपास वन क्षेत्र था, जिसमें बहुत से जानवर थे। इनके शिकार के लिए नवाब अहमद अली खान बहादुर ने कुत्तों की नई नस्ल तैयार कराई थी, जिसका नाम भी रामपुर के नाम पर रामपुर हाउंड रखा गया।
इतिहासकारों के अनुसार रामपुर शहर में नवाबी दौर से ही कुत्ते पाले जाते थे। नवाब शिकार के लिए रामपुर हाउंड का इस्तेमाल करते थे। यह लंबा और चुस्त होता है। पूंछ भी लंबी होती है जो ज्यादातर झुकी रहती है, लेकिन जब यह शिकार के पीछे दौड़ता है तो पूंछ सीधी हो जाती है। इसकी पतली और लंबी टांगें इसे तेज गति से भागने में मदद करती हैं।
अब रामपुर में दोगली नस्ल के कुत्ते
नवाबी दौर खत्म होने के साथ सरकार ने शिकार पर पाबंदी लगा दी। ऐसे में शिकारी कुत्ते रामपुर हाउंड की उपयोगिता भी कम हो गई। दूसरी नस्ल के कुत्ते रामपुर हाउंड के मुकाबले ज्यादा सुंदर होते हैं। इस वजह से लोग अन्य नस्ल के कुत्ते पालने लगे। लोगों ने रामपुर हाउंड को घरों से निकाल दिया तो गलियों में घूमने लगे और अन्य कुत्तों के संपर्क में आए। रामपुर में दोगली नस्ल के कुत्ते गलियों में घूमते नजर आते हैं, जो देखने में रामपुर हाउंड से मिलते जुलते हैं, लेकिन ये असली रामपुर हाउंड नहीं हैं। रामपुर हाउंड अपनी ही जमीन से विलुप्त हो चुका है।
रामपुर हाउंड के नाम पर डाक टिकट भी हो चुका है जारी
नवाब अहमद अली खान बहादुर शिकार के शौकीन थे। 1794 से 1840 तक रामपुर में उनका शासन रहा। उनके द्वारा तैयार कराए गए कुत्ते रामपुर हाउंड को पूरे देश में पहचान मिली। केंद्र सरकार ने 2005 में रामपुर हाउंड पर डाक टिकट भी जारी किया। मध्यप्रदेश पुलिस ने इसे अपने डाग स्क्वाड में शामिल किया है।
रामपुर हाउंड की ये हैं खासियत
-रामपुर हाउंड की ऊंचाई 22-30 इंच होती है।
– इसका वज़न 23-32 किग्रा होता है।
-इसका जीवनकाल 10-12 साल माना गया है
– इस नस्ल के कुत्ते शिकार में बड़े माहिर होते हैं।
-रामपुर हाउंड की रफ्तार आम कुत्तों से बहुत अधिक होती है।
– इस ब्रीड के कुत्तों की पूंछ काफी लंबी होती है।
-शिकार के समय इस नस्ल के कुत्तों की पूंछ बिल्कुल सीधी हो जाती है।
– रामपुर हाउंड की पतली और लंबी टांगें इसे तेज गति से भागने में मददगार बनती हैं।
सशस्त्र पुलिस बल में रामपुर हाउंड को शामिल किए जाने पर जाहिर की खुशी
रामपुर। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) रुहेलखंड चैप्टर के सह संयोजक काशिफ खां ने रामपुर हाउंड को सशस्त्र पुलिस बल में शामिल किए जाने के फैसले पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि नवाब अहमद अली खान ने इस नस्ल को तैयार कराया था। रामपुर हाउंड ही भारत की एक मात्र डॉग ब्रीड है, जो कि वर्ल्ड डॉग फेडरेशन में रजिस्टर्ड है। कहा कि सरकार का फैसला सराहनीय है।