बरेली

याद उन्हें भी कर लें जो लौट के घर न आए…

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याद उन्हें भी कर लें जो लौट के घर न आए...


By: Inextlive | Updated Date: Tue, 15 Aug 2023 02:55:00 (IST)




1962 से अब तक जिले के 45 वीर जवानों ने देश के लिए दी शहादत

बरेली (ब्यूरो)।देश की आजादी के लिए भारत मां के लाखों सपूतों ने बलिदान दिया था। इसके बाद जब भी देश की सुरक्षा की जरूरत पड़ी वीर जवानों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वालों में बरेली के वीर सपूत भी किसी से पीछे नहीं रहे। साल 1962 से अब तक जिले के 45 वीर जवानों ने अपना बलिदान दिया है। आजादी के अमृत महोत्सव के जश्न के मौके पर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट उन सभी वीर सैनिकों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। आप भी उन सभी वीरों को याद करें जो लौट के घर न आए।

शहादत में बरेली तहसील के जवान आगे
देश की सुरक्षा के लिए अपनी शहादत देने वाले वीर सैनिकों में बरेली तहसील के सैनिक आगे रहे हैं। सैनिक कल्याण बोर्ड के डाटा के अनुसार शहीद वीर सैनिकों की संख्या अब तक 45 है। इनमें सबसे अधिक बरेली तहसील के 27 जवान, आंवला तहसील के सात जवान, फरीदपुर के पांच, मीरगंज के तीन और नवाबगंज तहसील के एक वीर जवान शामिल हैं।

शहीदों में अफसर भी पीछे नहीं
देश के लिए शहीद होने वाले जिले के वीर सपूतों में सिपाही से लेकर अफसर तक शामिल हैं। वर्ष 1962 से अब तक शहीद वीर सपूतों की सूची में सेकेंड लेफ्टिनेंट से ऊपर रैंक के सात अफसर शामिल हैं। हवलदार और सूबेदार रैंक के छह जवान हैंं। शेष 31 शहीद वीर सपूत हवालदार से नीचे रैंक के हैं।

वर्ष 1971 की जंग में शहीद हुए 8 सपूत
देश की सुरक्षा के लिए चीन और पाकिस्तान शुरू से ही चुनौती बना रहा। इसमें पाकिस्तान की चुनौती ज्यादा बड़ी रही। यही वजह है कि पाकिस्तान की चुनौती से निपटने में ही सबसे अधिक सैनिकों को शहादत देनी पड़ी है। जिले के शहीद वीर सपूतों में भी पाकिस्तान की चुनौती से निपटने में शहीद हुए सैनिकों की संख्या ही अधिक है। वर्ष 1962 में भारत-चीन के बीच हुए युद्ध मेें जिले के छह जवान शहीद हुए। इसके बाद भारत-पाक के बीच वर्ष 1965 और वर्ष 1971 के युद्ध में जिले के 11 सैनिकों ने शहादत दी। इसके बाद भी जिले के जो सैनिक शहीद हुए हैं, वह पाकिस्तान की चुनौती से निपटने के लिए चलाए गए मिलिट्री आपरेशन में शहीद हुए।

जांबाजी पर मेडल से नवाजे गए शहीद
कुछ जवान ऐसी जाबांजी के साथ शहीद होते हैं कि उन्हें सेना मरणोपरांत भी मेडल से सम्मानित करती है। जिले के शहीद जवानों में भी कई ऐसे जाबांज रहे हैं, जो इस जाबांजी पर मेडल से नवाजे गए। इनमें वर्ष 1991 भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए कैप्टन पीके जौहरी शामिल हैं। इन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया। वर्ष 1991 के युद्ध में ही शहीद हुए मेजर लाल बहादुर गुरंग तो अपनी बहादुरी पर मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजे गए। वर्ष 1991 की ही लड़ाई में शहीद हुए नायक चौटन सिंह भी सेना मेडल से नवाजे गए। वर्ष 1991 के युद्ध में दुश्मन के फायर से विमान के क्षतिग्रस्त होने पर शहीद हुए विंग कमांडर हरशेर सिंह गिल को भी मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजा गया। वर्ष 1989 में आपरेशन पवन में शहीद हुए सेकेंड लेफ्टिनेंट अमरदीप सिंह भी मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजे गए। वर्ष 1999 में आपरेशन रक्षक में शहीद हुुए नायक खीम सिंह भी सेना मेडल से सम्मानित हुए। वर्ष 2003 में चलाए गए आपरेशन पराक्रम में शहीद हुए लेफ्टिनेंट पंकज अरोरा भी मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित हुए।

दूसरे देश में दी शहादत
बरेली के वीर जवानों ने न सिर्फ देश की रक्षा के लिए ही अपने प्राण न्यौछावर किए, बल्कि दूसरे देश की शांति के लिए भी अपने प्राणों की बाजी लगाई। वर्ष 1987 में श्रीलंका में चलाए गए आपरेशन पवन के दौरान तमिल विद्रोहियों से लड़ते हुए सिपाही सर्वेश कुमार शर्मा शहीद हुए। इसी अपरेशन में सैनिक श्याम वीर सिंह ने भी अपनी शहादत दी। सिपाही सर्वेश कुमार ने भी इसी आपरेशन में तमिल आतंकवादियों से लड़ते हुए अपनी शहादत दी। इसी आपरेशन में सितंबर 1988 में सिपाही रविंद्र सिंह भी शहीद हुए। इसी आपरेशन में सितंबर 1988 में गाड्र्समैन जोरावर भी शहीद हुए। आपरेशन पवन में ही तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ते हुए सेकेंड लेफ्टिनेंट अमर दीप सिंह भी शहीद हुए।

अब तक शहीद हुए सपूतों की सूची
सैनिक वर्ष
कुदुबुद्दीन खान 1962
लां नायक संतोष सिंह 1962
गाड्र्समैन मलखान 1962
राइफलमैन झंडू राम 1962
सिपाही बन्ने 1962
सिपाही स्वरूपी प्रताप सिंह 1962
सिपाही उस्मान खान 1965
सिपाही किशन सिंह भंडारी1965
मेजर स्वदेश नारायण 1965
गनर यशवंत सिंह 1971
कैप्टन पीके जौहरी 1971
मेजर लाल बहादुर गुरंग 1971
सिपाही मुंशी लाल 1971
सिपाही अंगल लाल 1971
नायक चौटन सिंह 1971
पैटी अफसर एके खान 1971
विंग कमांडर हरशेर सिंह1971
सिपाही सर्वेश कुमार शर्मा 1987
सवार श्याम वीर सिंह 1987
सिपाही सरवेश कुमार 1987
सिपाही रविन्द्र सिंह पोखरियाल 1988
गाड्र्समैन जोरावर 1988
से.ले। अमरदीप सिंह वेदी 1989
नायक धर्मपाल 1993
गाड्र्समैन छेंदाला 1994
नायक राजेन्द्र पाल सिंह 1998
नायक खीम सिंह 1999
हवालदार सुभाष चन्द्र 2000
ला। नायक राम अवतार 2000
हवालदार रामवीर सिंह 2000
नायक राम सहाय मिश्रा 2001
सिपाही अनिल कुमार सिंह 2002
हवलदार कप्तान सिंह 2002
सिपाही उपेन्द्र सिंह 2002
हवालदार सुभाष सिंह2002
सिपाही रनजीत सिंह 2002
नायक भुवन चन्द्र तिवारी 2002
सिपाही टेक चन्द्र 2003
ले। पंकज अरोरा 2003
ना। सूबेदार अमीर सिंह 2004
सिपाही वीरपाल 2008
ले। कर्नल नितिन भाटिया 2011
हवालदार राजेन्द्र प्रसाद 2012
ला। नायक दीन दयाल 2012
नायक चन्द्र भान 2017


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