Rs 2000 Notes: लोकसभा चुनाव से पहले जमाखोरों पर चोट, विशेषज्ञों ने सराहा; जानिए व्यापारियों ने क्या कहा

दो हजार का नोट
विस्तार
प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी की थी। अब एक बार फिर लोकसभा चुनाव से पहले दो हजार का नोट बंद कर जमाखोरों पर चोट की है। विशेषज्ञ जहां इस फैसले की सराहना कर रहे हैं, वहीं व्यापारियों व राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है।
बरेली के व्यापारियों का कहना है कि यह अच्छा फैसला रहा, क्योंकि दो हजार के नोट पहले से ही बाजार से लापता हो गए थे। कुछ व्यापारियों का यह भी कहना है कि इस तरह के फैसले सरकार को नहीं करने चाहिए। विपक्षी पार्टियां भी इस फैसले को गलत ठहरा रही हैं। फिलहाल, इससे पारदर्शिता के साथ ही ऑनलाइन लेनदेन को बढ़ावा मिलने के आसार हैं।
सीए शांतनु सक्सेना कहते हैं कि सरकार ने जब पहले नोटबंदी की थी तो उन नोटों को अवैध करेंसी करार दे दिया था। जनता सिर्फ बैंकों में ही नोट जमा कर पा रही थी। इस बार ऐसा नहीं हुआ है, जबकि सरकार भी इस बात को मान रही है कि ये नोट अब चलन में नहीं हैं।
सरकार को चाहिए था कि दो हजार के नोट को भी अवैध करेंसी घोषित कर देती और निर्धारित समय सीमा में बैंकों में जमा करने का आदेश दे देती। ऐसा न करने से अब यह पैसा लोग बाजार में खपाना शुरू करेंगे। अगले एक महीने में बाजार में बड़ी तादात में ये नोट पहुंच जाएंगे। यह भी कहा कि बड़े नोट चलन से बाहर होंगे तो ऑनलाइन लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में सरकार को मदद मिल सकेगी।



