Sawan 2023: श्री सहस्रधाम गौरीशंकर मंदिर में स्थापित है पारे और सोने से बना शिवलिंग; यह है मान्यता

गौरीशंकर मंदिर में शिवलिंग की पूजा करते पुजारी
– फोटो : अमर उजाला
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बदायूं का श्री सहस्रधाम गौरीशंकर देवालय श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। यहां की खासियत मंदिर में स्थापित पारे का बना रसलिंग (शिवलिंग) है। सावन में यहां शिवभक्तों की भीड़ उमड़ रही है। हजारों कांवड़िये गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।
शहर के उसावां रोड पर मंडी समिति के पास स्थित गौरीशंकर मंदिर की स्थापना वर्ष 2000 में रामशरण रस्तोगी ने की थी। मंदिर के मुख्य पुजारी कृष्ण नेपाली मूल के हैं, उनके साथ असम से पुजारी भीष्म भी हैं। यह दोनों 2017 से यहां पर पांडित्य कर्म कर रहे हैं।
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पुजारी कृष्ण के मुताबिक मंदिर को जिस खास शिवलिंग (रसलिंग) के लिए जाना जाता है, वह पारे व सोने से बना है। विश्व का ऐसा दूसरा शिवलिंग केवल नेपाल के पशुपतिनाथ में ही है। वहां की तर्ज पर ही गौरीशंकर देवालय में भी पूजा पाठ होता है। मान्यता है कि इस रसलिंग के स्पर्श, पूजन से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।