व्यापार

सेबी ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग और प्रमोटर को 7 साल के लिए बैन, 21 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

Connect News 24

कार्वी घोटाला: मार्केट राइट्स सेबी ने कार्वी डीमैट घोटाले से जुड़े मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए फैसला सुनाया। सेबी ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड (केएसबीएल) और उसके प्रमोटरों कोमांदुर पार्थसारथी पर 7 साल का प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही ग्राहकों को करने के लिए उनके ऊपर 21 करोड़ रुपये का टैगड़ा जुर्माना भी लगाया जाता है। इसमें से 13 करोड़ रुपए का जुर्माने कर्वी ब्रोकिंग और 8 करोड़ रुपए का जुर्माने वाला बैंकर पार्थसारथी को देना होगा।

पैसे लौटाने का आदेश

इसके साथ ही मार्केट रेगुलेटर ने KSBL के दोनों सब्सिडियरी कार्वी रियल्टी इंडिया लिमिटेड और कर्वी कैपिटल लिमिटेड को 1,442.95 करोड़ रुपये की रकम वापस लौटाने का भी ऑर्डर दिया है। ध्यान देने वाली बात ये हैं कि डीमैट खाते के स्कैम के माध्यम से इन प्राधिकरणों को लाभ मिला था। अगर यह दोनों कंपनियां बकाया चुकाने में विफल रहती हैं, तो सेबी इन दोनों की संपत्ति को एनएसई से ज़ब्त करके निलाम कर देंगे और आपकी देयता की वसूली कर लेंगे। आरोपित है कि कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग घोटाला वित्त वर्ष 2017 से 2020 के बीच हुआ था।

अफसरों ने भी लगाया मुनादी

सेबी ने अनिश्चितता की अनदेखी करने के आरोप में कर्वी स्टॉक ब्रोकिंग पर जहां 13 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है, वहीं इस कंपनी के एमडी और प्रमोटर पार्थसारथी पर कुल 8 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही ब्रोकिंग कंपनी और पार्थसारथी को शेयर बाजार से 7 साल के लिए बैन भी कर दिया है। इसके साथ ही बाज़ार अभिलेख ने कंपनी के स्वतंत्र निदेशकों भगवान दास नारंग और ज्योति प्रसाद पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माने भी दिया है। इसके साथ ही यह भी आदेश दिया है कि यह दोनों व्यक्ति अगले दो साल तक किसी भी मार्केट में लिस्टेड कंपनी पर अहम पद नहीं ले सकते हैं। सेबी ने कंपनी के सीईओ राजीव रंजन सिंद पर जेसी करने पर विवाद को रद्द कर दिया है। उन्हें शेयर बाजार से भी दो साल की दूरी बनाने का दावा किया गया है।

कार्वी घोटाला क्या था?

सब्सक्राइबर है कि कर्वी डीमैट घोटाला वित्त वर्ष 2017 से 2020 में किया गया था जब प्रवासी फर्मों ने अपने ग्राहकों के पैसे को गिरवी रखने वाले खाते और एनबीएफसी से ऋण लिए थे। जिन बैंकों ने लोन लिया था उसमें बैंक, इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक, आदित्य बिड़ला और खाते खाते जैसे बैंक और एनबीएफसी शामिल थे। सेबी ने इस मामले में पाया कि कार्वी ने सितंबर 2009 तक कुल 2,700 करोड़ रुपये की संपत्ति के बदले में इसी से 2,032.67 करोड़ रुपये का लोन लिया। कार्वी ने अपने कुल स्टॉक का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा लोन के लिए गिरवी रखा था। इस घोटाले के सामने आने के बाद सेबी के कई सवाल उठे थे।

पैसा रीलों

ये भी पढ़ें-

यूएस बैंक: अमेरिका के एक बैंक के शेयर में 50 फीसदी की बड़ी गिरावट, क्या ये डूबेगा?

(टैग्सटूट्रांसलेट)कार्वी घोटाला(टी)सेबी(टी)केएसबीएल(टी)कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड(टी)सेबी ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड(टी)सेबी ने केएसबीएल(टी)कार्वी घोटाला समाचार(टी)कार्वी डीमैट घोटाला(टी) पर प्रतिबंध लगाया Business News


Connect News 24

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button