Shahjahanpur News: पशु बीमार… अस्पतालों पर ताले, चिकित्सक भी आधे

जैतीपुर क्षेत्र के पृथ्वीपुर गांव चिकित्सक की कमी वजह से अस्पताल हुआ खंडहर। संवाद
शाहजहांपुर। पशु चिकित्सकों और स्टाफ की कमी से कई पशु अस्पताल बंद ही रहते हैं। ऐसे में बीमार पालतू पशुओं का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है। पशुओं के टीकाकरण से लेकर इलाज तक प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण अपने पशुओं का इलाज झोलाछाप या निजी डॉक्टर के पास ले जाने को मजबूर हैं।
जिले में 31 पशु अस्पताल हैं। इसमें मात्र 17 में ही चिकित्सक तैनात हैं। प्रत्येक अस्पताल में एक फार्मासिस्ट जरूरी है, लेकिन निगोही और जलालाबाद पशु चिकित्सालय में ही इनकी तैनाती है। 78 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद हैं। इसमें ड्रेसिंग से लेकर सफाई कर्मचारी तक शामिल हैं, लेकिन 33 कर्मचारियों की ही तैनाती है। पशु सेवा केंद्र 29 हैं, जिनमें से 20 पर ही पशुधन प्रसार अधिकारी नियुक्त हैं। नौ पशु सेवा केंद्र बंद हैं।
निजी चिकित्सकों से करा रहे पशुओं का इलाज
सरकारी पशु चिकित्सकों की कमी से ग्रामीण पशुओं का इलाज निजी डॉक्टरों से कराते हैं, जो कि काफी महंगा पड़ता है। पशुओं की दवाएं भी काफी महंगी आती है। यदि सभी अस्पतालों में फार्मासिस्ट की तैनाती कर दी जाए तो कम से कम पशुओं के लिए दवा तो मिल जाएगी।
लंपी वायरस बन सकता है बड़ा खतरा
पशुओं में लंपी वायरस का खतरा मंडरा रहा है। जिले में पशुओं का टीकाकरण कराया जा जा रहा है। लंपी वायरस मुख्य रूप से गोवंशीय पशुओं को होता है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लखीमपुर खीरी की सीमा से सटे सात ब्लॉकों के एक लाख, 16 हजार पशुओं काे टीके लगाए जा चुके हैं। आठ ब्लॉकों में टीकाकरण चल रहा है।
2019 की जनगणना के अनुसार पशुओं की स्थिति
गोवंयीय – 261143
महिषवंशीय – 605387
भेड़- 2342
बकरी – 97147
सूअर – 3791

जैतीपुर क्षेत्र के पृथ्वीपुर गांव चिकित्सक की कमी वजह से अस्पताल हुआ खंडहर। संवाद

जैतीपुर क्षेत्र के पृथ्वीपुर गांव चिकित्सक की कमी वजह से अस्पताल हुआ खंडहर। संवाद

जैतीपुर क्षेत्र के पृथ्वीपुर गांव चिकित्सक की कमी वजह से अस्पताल हुआ खंडहर। संवाद