Shahjahanpur News: रहें सावधान…. तेज धूप और लू बिगाड़ न दे सेहत
शाहजहांपुर। तेज धूप और लू से लोगों को सोमवार को भी राहत नहीं मिल सकी। सुबह 10 बजे के बाद ही गर्म हवा के थपेड़े लोगों को बेहाल करने लगे। दोपहर में तो धूप इस कदर तेज हो गई कि घर से निकलना ही मुश्किल हो गया। जिला प्रशासन ने लू के प्रकोप के मद्देनजर एडवाइजरी जारी की है। बचाव के तरीके भी बताए गए हैं।
गन्ना शोध संस्थान के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह ने बताया कि सोमवार को अधिकतम तापमान 41.1 डिग्री और न्यूनतम 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रविवार को अधिकतम तापमान 40.9 डिग्री और न्यूनतम 25.8 डिग्री सेल्सियस रहा था। अधिकतम तापमान में 0.2 डिग्री की वृद्धि और न्यूनतम में 0.2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है।
पूर्वानुमान है कि तापमान में हो रहे फेर बदल से अगले दो दिन में आंधी के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। एक्सपर्ट का मानना है कि लू लगने की संभावना पांच वर्ष तक के बच्चों और 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों में ज्यादा होती है। इसके अलावा शारीरिक तौर पर कमजोर या मोटापे से ग्रस्त लोग भी लू की चपेट में ज्यादा आते हैं। इस वजह से लू से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
जिला आपदा प्रबंधन ने जारी की एडवाइजरी
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से मई में लू (हीटवेब) चलने के मद्देनजर अलर्ट जारी किया गया है। कहा, गया है कि जब तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से 3-4 डिग्री अधिक हो जाता है, तब चलने वाली गर्म हवाओं को लू कहते हैं। लू से बचाव के लिए आवश्यक है कि पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। सिर को ढककर रखें। भरपूर पानी पीने के बाद ही घर से निकलें।
लू लगने के लक्षण
त्वचा का गर्म, लाल और शुष्क होना। पसीना न आना। पल्स रेट बढ़ना। श्वास की गति में तेजी आना। व्यवहार में परिवर्तन। भ्रम की स्थिति पैदा होना। सिरदर्द, मिचली, थकान और कमजोरी होना। चक्कर आना, मूत्र न होना अथवा इसमें कमी आदि मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों के चलते शरीर का उच्च तापमान आंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है।
लू से बचने के लिए यह करें
राजकीय मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएल अग्रवाल के मुताबिक, लू से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीएं। शरीर में पानी की पूर्ति के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), लस्सी, तोरानी (चावल का पानी), नींबू का पानी, छाछ आदि का इस्तेमाल करें। हल्के वजन, हल्के रंग के, ढीले सूती कपड़े पहनें। सिर ढककर रखें। हाथों को साबुन और पानी से बार-बार धोएं। जहां तक संभव हो, घर से निकलने से बचें। यदि गरमी के चलते किसी की तबीयत खराब हो तो प्राथमिक इलाज के तौर पर उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें। शरीर को गीला रखें, उन्हें नहलाएं अथवा उनकी गर्दन तथा बगलों में गीला तौलिया रखें। यदि बच्चों के पेशाब का रंग गहरा है तो इसका मतलब है कि वे पानी की कमी का शिकार हैं।

