शाहजहाँपुर

Shahjahanpur News: कल नहाय खाय के साथ शुरू होगी छठ पूजा

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शाहजहांपुर। छठ पूजा इस बार 17 नवंबर से शुरू होगी। जिले में रहने वाले पूर्वांचल निवासी करीब 10 हजार परिवारों ने पूजा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

पहले दिन शुक्रवार को नहाय खाय के साथ इसकी शुरुआत होगी। नहाय खाय के दिन घर की साफ-सफाई की जाती है, व्रती नदी या तालाब में स्नान करते हैं। मूल रूप से इस दिन से व्रती खुद को सात्विक और पवित्र कर छठ का व्रत रखते है। नहाय खाय के दिन पूरी शुद्धता के साथ भोजन बनाया जाता है। इसमें स्त्रियां कच्चे चावल का भात, चना दाल और कद्दू (लौकी या घीया) प्रसाद के रूप में बनाकर ग्रहण करती हैं। मान्यता है कि इस दिन से स्त्रियों का छठ पूजा का नियम शुरू हो जाता है। इस दिन एक समय नमक वाला भोजन किया जाता है। जबकि दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन उदयगामी सूर्य यानी उगते सूर्य को जल अर्पित कर इसका समापन किया जाएगा। मान्यता के अनुसार छठ पूजा में संतान की खुशहाली के लिए स्त्रियां 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं जोकि काफी कठिन होता है।

पूर्वांचल महासभा के अध्यक्ष सतीश मिश्रा ने बताया कि खन्नौत नदी पर सफाई कराने के लिए नगर निगम को पत्र लिखा था। खन्नौत नदी के घाट पर ही छठ पूजा संपन्न होगी और मेला लगेगा।

पहले दिन नहाय खाय की परंपरा निभायी जाएगी

कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी नहाय खाय से छठ का आरंभ होगा और सप्तमी तिथि के दिन उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा। नहाय खाय का शुभ मुहूर्त सूर्योदय सुबह 06:45 पर होगा। जबकि सूर्यास्त शाम 05:27 बजे होगा। नहाय खाय चौघड़िया मुहूर्त चर (सामान्य) सुबह 06:45 से 08:05 बजे तक, लाभ (उन्नति)- सुबह 08:05 से 09:25 बजे तक, शुभ (उत्तम) – दोपहर 12.06 से 01.26 बजे तक रहेगा।

दूसरे दिन होगी खरना की पूजा

नहाय-खाय के अगले दिन यानी छठ पूजा के दूसरे दिन शाम को खरना की पूजा होगी। इसमें व्रती सुबह से उपवास रखकर शाम को लकड़ी के चूल्हे पर गुड़ और चावल की खीर, पूड़ी या रोटी बनाएंगी। घी लगी रोटी और खीर के साथ मौसमी फल से भगवान भास्कर को प्रसाद अर्पण करती हैं और फिर व्रती के प्रसाद ग्रहण करने के बाद अन्य लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।

तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य

खरना के बाद व्रती का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। खरना के अगले दिन व्रती नदी या तालाब किनारे सपरिवार जाती हैं और नदी में खड़े होकर विधि-विधान से अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन अर्घ्य के सूप को फल, ठेकुआ मौसमी फल और फूल से सजाया जाता है। अर्घ्य के बाद लोग या तो घर लौट आते हैं या घाट पर ही रातभर रहते हैं। छठ पूजा का पहला अर्घ्य के लिए सूर्यास्त की शुरूआत 05 बजकर 34 मिनट से होगी।

चौथे दिन उदीयमान सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य

छठ पूजा के चौथे दिन व्रती नदी या तालाब में या कहीं भी जल में खड़े होकर उदीयमान सूर्य को विधि-विधान से सजे हुए सूप के साथ अर्घ्य देती हैं और इसी के साथ लोक आस्था का पर्व छठ संपन्न हो जाता है। व्रती पारण कर छठ पूजा का व्रत तोड़ती हैं और इस तरह से छठ पूजा की समाप्ति होती है। इस दिन सूर्योदय 6 बजकर 27 मिनट पर होगा।


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