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Shahjahanpur News: अंधविश्वास से नहीं उपचार से सही होता है मिर्गी रोग

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शाहजहांपुर। मिर्गी के दौरे को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। मरीज को दौरा पड़ने पर गंदा जूता-मोजा सुंघाना या लोहे को पकड़वाना आदि लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि मरीज को तीन साल तक लगातार उपचार करने के बाद ही वह 90 फीसदी तक ठीक हो जाता है। इसको लेकर हर वर्ष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस हर वर्ष 17 नवंबर को मनाया जाता है। इसमें मिर्गी को लेकर अंधविश्वास को खत्म करने के लिए जागरूक किया जाता है। डॉक्टर के अनुसार, मिर्गी लंबे समय से चली आ रही एक बीमारी है, जो सीधे दिमाग पर असर करती है। इससे व्यक्ति पर बेहोशी छा जाती है या फिर दौरे पड़ने लगते हैं। मिर्गी का दौरा किसी भी उम्र में व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। स्टेट मेडिकल कॉलेज के क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. रोहताश ईशा बताते हैं कि मरीज को तुरंत उपचार शुरू कराना चाहिए। इससे 90 फीसदी तक लाभ होता है।

लक्षण : बेहोशी आने के साथ अचानक पूरे शरीर और हाथ-पैरों में झटके लगने लगते हैं। मुंह से झाग निकलने लगता है। शरीर में सुइयां चुभने जैसा महसूस होता है। हाथ-पैरों की मांसपेशियां असमान्य रूप से अकड़ जाती हैं।

ये बरतें सावधानी : मिर्गी का दौरा पड़ने पर मरीज की गर्दन के पास से किसी भी तरह का टाइट कपड़ा हटा दें, ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो। दौरा खत्म होने तक व्यक्ति के पास रहें। मरीज के मुंह में कुछ भी न डालें उसे आराम करने दें।

पांच से सात रोजाना आते मरीज

राजकीय मेडिकल कॉलेज के मन कक्ष में रोजाना ही 50 से 60 मरीज आते हैं। इनमें पांच से सात मरीज मिर्गी के आते हैं। इसमें एक या दो मरीज नए होते हैं।

-मिर्गी को लेकर काफी ज्यादा अंधविश्वास लोगों में है पर इसका उपचार दवा के जरिये होता है। तीन साल तक उपचार कराने पर 90 प्रतिशत तक लाभ होने की संभावना बनी रहती है।

डॉ. रोहताश, क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक-राजकीय मेडिकल कॉलेज।


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