Shahjahanpur News: ओपीडी से लेकर ट्रामा सेंटर तक इलाज के लिए मारामारी, डेढ़-डेढ़ घंटे में बने पर्चे

राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पर्चा बनवाने को लगी लंबी लाइन। संवाद
शाहजहांपुर। बदलते मौसम में बुखार, डायरिया आदि के मरीजों की संख्या बढ़ने से राजकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था चरमरा गई है। ओपीडी से लेकर ट्रामा सेंटर तक इलाज के लिए मारामारी मची हुई है। स्थिति यह थी कि पर्चे के लिए लाइन में लगे मरीजों और तीमारदारों का नंबर एक से डेढ़ घंटे बाद आ सका। ट्रामा सेंटर में भीड़ बढ़ने पर डॉक्टर ने तीमारदारों को बाहर निकाल दिया।
सोमवार सुबह मरीजों की इस कदर भीड़ उमड़ी कि पर्चा बनवाने के लिए काउंटर से जीने तक लाइन लग गई। शुरुआत में पर्चा देरी से बनने के चलते डॉक्टर के चैंबर में सन्नाटा पसरा रहा। पर्चा बनवाने के बाद मरीजों को डॉक्टर को दिखाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। बुखार, डायरिया, ब्लड प्रेशर, हड्डी आदि रोगों से पीड़ित मरीजों को दवा लेने के लिए भी लंबी लाइन लगानी पड़ी। दोपहर तक 1309 मरीजों के नए पर्चे बनाए गए, जबकि पुराने पर्चों पर भी मरीज दवा लेने पहुंचे थे। सबसे अधिक जनरल फिजिशियन को दिखाने के लिए करीब सात सौ मरीज पहुंचे। इसी तरह हड्डी रोगोंं से संबंधित करीब दो सौ मरीज आए थे।
ट्रामा सेंटर में नहीं मिले बेड, स्ट्रेचर पर किया इलाज
अस्पताल के ट्रामा सेंटर की व्यवस्था भी सोमवार को जवाब दे गई। हादसों में घायल, ब्लडप्रेशर, सांस समेत कई रोगों से जूझ रहे मरीज अस्पताल पहुंचे तो बेड फुल हो गए। इसके बाद स्ट्रेचर पर लिटाकर मरीजों का इलाज किया गया। मरीजों के तीमारदारों की भीड़ और क्षमता से अधिक मरीजों के चलते डॉक्टर भी परेशान हो गए। मरीज तक पहुंचने में दिक्कत आने पर डॉक्टर ने तीमारदारों को ट्रामा सेंटर से बाहर करा दिया।
एक दिन में हुईं खून की चार हजार जांचें
अस्पताल में मरीजों के बढ़ने के साथ ही खून की जांच का दायरा भी बढ़ गया। आमतौर पर खून की तीन हजार तक जांचें होती थीं, लेकिन वर्तमान में प्रतिदिन चार हजार से ऊपर जांचें की जा रही हैं।
अतिरिक्त बेड डलवाए फिर भी नहीं मिली राहत
मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त बेड डलवा दिए हैं। 330 बेड के अस्पताल में वर्तमान में 450 बेड हैं। अस्पताल के पीछे नए भवन में भी अलग-अलग फ्लोर पर बेड डालकर इलाज की व्यवस्था की गई है फिर भी मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है।
स्टाफ कम, पर्चा बनवाने में लग रहा एक से डेढ़ घंटा
पहले अस्पताल में पर्चा हाथ से बनाया जाता था। इसके बाद कंप्यूटर से पर्चा बनाने की व्यवस्था कर दी गई। इसके लिए चार काउंटर बनाकर कंप्यूटर लगाए गए, लेकिन इंटरनेट की दिक्कत होने के चलते ज्यादा पर्चा बनने में देरी होती है। इसी तरह प्रशिक्षित स्टाफ नहीं होने के चलते पर्चा तेजी से नहीं बन पा रहा। इसके चलते काउंटर पर लंबी लाइन लग रही है। एक पर्चा बनवाने में एक से डेढ़ घंटे का समय लग रहा है। मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन से अतिरिक्त स्टाफ लगाने की मांग की है।
बेहोश होकर गिर पड़ीं कांति देवी
फोटो नंबर 26
पुराने जिला अस्पताल के पास रहने वाली कांति देवी सोमवार को दवा लेने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज गईं थीं। लंबी लाइन में लगने के दौरान गर्मी के चलते चक्कर आने पर गिर पड़ीं। आसपास खड़े रोगियों ने उन्हें संभाला और किनारे बैठाया। कांति देवी ने बताया कि वह बीमार हैं और काफी देर से पर्चा बनवाने के लिए लाइन में लगीं थीं।
वर्जन
मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए और बेड की व्यवस्था की जाएगी। पर्चा कंप्यूटर से बनने की वजह से कुछ देरी लग रही है। मरीजों के लिए एप की व्यवस्था भी की गई। – डॉ. शैलेंद्र कुमार, सीएमएस, राजकीय मेडिकल कॉलेज

राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पर्चा बनवाने को लगी लंबी लाइन। संवाद

राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पर्चा बनवाने को लगी लंबी लाइन। संवाद

राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पर्चा बनवाने को लगी लंबी लाइन। संवाद

