Shahjahanpur News: हरित शवदाह प्रणाली बचाएगी हरियाली
शव दहन करने में लकड़ी की 60 प्रतिशत तक खपत कम होने का अनुमान
युगेश कृष्ण
शाहजहांपुर। श्मशान घाटों में लकड़ी की खपत कम करने के लिए निगम की ओर से शहर के तीन श्मशान घाटों पर ग्रीन क्रीमेशन सिस्टम (हरित शवदाह प्रणाली) लगाया जाएगा। इस सिस्टम के लगने से एक शव के दाह संस्कार में 60 फीसदी तक लकड़ी की बचत होगी। ऐसे में पेड़ों का कटान कम होगा।
वैसे एक शव को दहन करने में तीन से पांच क्विंटल तक लकड़ी खर्च होती है। लकड़ी खपत कम हो सके इसके लिए नगर निगम ने शहर के तीन श्मशान घाटों पर हरित शवदाह प्रणाली का प्रयोग करने का निर्णय किया है।
परंपरागत और हरित शवदाह प्रणाली में कोई विशेष अंतर नहीं है। अंतर बस इतना है कि परंपरागत रूप से शवदाह जमीन पर होता है, जबकि मोक्षदा हरित शवदाह प्रणाली एक फ्रेम पर आधारित है। इससे धार्मिक परंपराओं पर भी असर नहीं पड़ता। (संवाद)
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शहर के तीन श्मशान घाटों को किया गया चिह्नित
हरित शवदाह प्रणाली को लगाए जाने के लिए शहर के तीन श्मशान घाटों को चिह्नित किया गया है। इनमें खन्नौत व गर्रा नदी के घाट पर स्थित मोक्षधाम के साथ ही गौटिया का श्मशान घाट भी शामिल है। इन श्मशान घाटों के दो-दो चबूतरों पर इस प्रणाली को लगाया जाएगा।
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लगाई जानी थी विद्युत शवदाह प्रणाली
पूर्व में खन्नौत घाट स्थित मोक्षधाम पर विद्युत शवदाह प्रणाली को लगाया जाना था लेकिन स्थानीय स्तर पर इस प्रणाली विरोध का किया गया। इसी को ध्यान में रखकर यहां भी हरित शवदाह प्रणाली को लगाए जाने का निर्णय हुआ है।
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देश में 54 से अधिक यूनिट संचालित
भारत सरकार के सहयोग से हरित शवदाह प्रणाली की शुरुआत हरिद्वार से शुरू हुई थी, फिलहाल अब सात राज्यों में 54 से अधिक यूनिट संचालित हो रहीं हैं।
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850-1000 रुपये प्रति क्विंटल है लकड़ी
लालपुर स्थित मोक्षधाम में लकड़ी की ठेकी के संचालक तालिफ बताते हैं कि एक शव के अंतिम संस्कार में तीन से पांच क्विंटल तक लकड़ी लगती है। वह 850 रुपये क्विंटल के हिसाब से लकड़ी बेचते हैं। जबकि दूसरे श्मशान घाट पर लकड़ी 1000 रुपये क्विंटल प्रति क्विंटल तक है।
हरित शवदाह प्रणाली को शहर के तीन श्मशान घाटों पर लगाए जाने की तैयारी है। जिससे लकड़ी की खपत को कम किया जा सकेगा। इस प्रणाली के लगने के बाद एक शहर के दाह संस्कार पर 60 प्रतिशत तक लकड़ी की खपत कम होगी।
– संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त

