Shahjahanpur News: बारिश में सभी नदियां उफान पर, भैंसी में धार तक नहीं

पुवायां क्षेत्र में सूखी पड़ी भेंसी नदी की भूमि पर अवैध कब्जे
पुवायां (शाहजहांपुर)। बारिश के मौसम में जब सभी नदियां उफान पर हैं, तब गोमती की सहायक भैंसी नदी में एक बूंद पानी नहीं है। सूखी पड़ी इस नदी की भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही है और कई जगहों पर अवैध खनन है।
भैंसी नदी पीलीभीत की पूरनपुर तहसील के डंडरौल और शाहजहांपुर की सीमा से लगी करीब 50 वर्ग किमी में फैली भैंसासुर झील से निकलती है। वहां से प्रवाहित होते हुए भैंसी नदी पुवायां के जसवंतपुर के पास लखीमपुर की सीमा में प्रवेश करती है। लखीमपुर के इमलिया घाट के पास गोमती में मिल जाती है। तकरीबन 42 किमी लंबी भैंसी नदी गोमती की सहायक नदियों में से एक है। फिलहाल, भैंसी नदी अथाह प्रदूषण और अवैध कब्जों के चलते दम तोड़ चुकी है।
कभी पुवायां और लखीमपुर की मोहम्मदी तहसील क्षेत्र के करीब 47 गांवों के लोगों को भैंसी नदी का लाभ मिलता था। नदी के पानी से फसलों की सिंचाई होती थी। कई अप्रत्यक्ष लाभ भी थे, लेकिन बाद में नदी के किनारे बने दो कारखानों ने नदी में अपशिष्ट छोड़कर नदी का पानी जलीय जंतुओं के लिए जहर बना दिया और रही-सही कसर अवैध कब्जों ने पूरी कर दी। नदी में 15 वर्ष से धार नहीं बह सकी है।
अवैध खनन करने वालों ने बिगाड़ा नदी का स्वरूप
भैंसी नदी से पुवायां क्षेत्र में कई स्थानों पर रोज रेत और मिट्टी का भारी खनन किया जा रहा है। खनन अधिकारी, प्रशासन और पुलिस कोई भी इस ओर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझता है। हालत यह हो गई है कि भैंसी नदी में तमाम स्थानों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं और भैंसी नदी का स्वरूप ही बिगड़ गया है।
साठा की फसल और भारी जल दोहन भी इसके सूखने की वजह
पुवायां क्षेत्र में कई वर्षों तक साठा धान की खेती बड़े क्षेत्रफल में की जाती रही है। साठा में बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए गहरी बोरिंग कराई गई और अंधाधुंध जल दोहन किया गया। इससे नदी के स्रोत सूख गए और बाद में नदी भी सूख गई। अब साठा धान की रोपाई पर जिले भर में पाबंदी है। 15 दिन पूर्व भारी बारिश से खेतों की मेड़ों के ऊपर से पानी बहने लगा था और पानी भैंसी नदी के पुल के पास भर गया था। इससे तीन दिन आवागम बंद रहा था, लेकिन नदी में धार बहने जैसी स्थिति नहीं बन सकी है।
लोकभारती संस्था ने किया था नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास
जुलाई 2019 में पुवायां के गांव मीरपुर के पास से लोकभारती संस्था ने भैंसी नदी नदी को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया था। इसके बाद काफी समय तक प्रत्येक रविवार को स्वयंसेवक नदी की सफाई के लिए जुटते रहे। शाहजहांपुर के तत्कालीन डीएम इंद्र विक्रम सिंह, मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह तंवर, एसडीएम, मनरेगा के डिप्टी कमिश्नर आदि ने स्वयं फावड़ा चलाकर भैंसी मुक्ति यज्ञ में भागीदारी की थी। कई प्रयासों के बाद भैंसी में बंडा के गांव कर्रखेड़ा गांव तक पानी भी आया, लेकिन अब नदी सूखी पड़ी है।