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Shahjahanpur News: रुद्रपुर में दंपती की हत्या कर भागे युवक की तलाश में दी दबिश

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Raid in search of a young man who fled after killing a couple in Rudrapur

गांव अनावां के राजकमल उर्फ जगदीश का फाइल फोटो

पुवायां (शाहजहांपुर)। रुद्रपुर में तीन दिन पहले दंपती की हत्या के मामले में पुलिस ने यहां के गांव अनावां के राजकमल उर्फ जगदीश की तलाश में दबिश दी। राजकमल के अलावा बहन और मामा के घर भी दबिश दी, लेकिन आरोपी हत्थे नहीं चढ़ा।

राजकमल कई वर्ष से ऊधम सिंह नगर में रहकर राज मिस्त्री का काम करता था। वह कुछ दिन पहले रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप वार्ड सात शिवनगर में किराये पर रहता था। उसके घर के सामने ही संजय यादव का परिवार रहता है। संजय एक दवा कंपनी में काम करते थे। उनकी पत्नी सोनाली सिडकुल में एक फैक्ट्री में काम करती थीं। राजकमल का संजय के घर आना-जाना था। किसी बात को लेकर हुए विवाद के बाद राजकमल दूसरी जगह रहने लगा था। दो अगस्त की रात दो बजे राजकमल मेन गेट की कुंडी काटकर संजय के घर में घुस आया।

इसके बाद उसने पहले संजय यादव की गला काटकर हत्या की। फिर दूसरे कमरे में सो रही सोनाली पर भी चाकुओं से कई वार कर उसे मार डाला। राजकमल के भागने के दौरान आहट होने पर सोनाली की मां गौरी मंडल ने उसे रोकने का प्रयास किया तो आरोपी ने उन्हें भी चाकू प्रहार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

घटना के पीछे प्रेम प्रसंग का मामला चर्चा में है। दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद से राजकमल फरार है। ऊधम सिंह नगर पुलिस ने पुवायां के गांव अनावां पहुंचकर राजकमल की तलाश में दबिश दी, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। राजकमल की बहन और मामा के घर भी पुलिस पहुंची, लेकिन पता चला कि राजकमल दोनों की जगह नहीं पहुंचा है।

जगदीश के नाम से जानते हैं गांव के लोग

पुवायां। गांव के लोग राजकमल नाम नहीं जानते हैं। गांव के लोगों ने बताया कि आरोपी का सही नाम जगदीश है। राजकमल नाम उसने फर्जी रूप से रख लिया होगा। जगदीश के पिता प्रहलाद और मां की मौत हो चुकी है। एक बड़ा भाई जदुवीर उर्फ छुटकाई मजदूरी कर परिवार की गुजर करता है।

गांव के लोगों ने बताया कि जगदीश कई वर्ष पूर्व ही गांव से काम करने के लिए कहीं चला गया था। गांव के लोग उसके दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने की जानकारी से सकते में हैं। लोगों के अनुसार, जगदीश सीधा था। उसकी गांव में कभी किसी से कहासुनी तक नहीं हुई। जगदीश दो-चार वर्ष में कभी कभार ही गांव आता था तो इधर-उधर रुक जाता है। गांव में उसकी कुछ जगह पड़ी हुई है। जगदीश के पास खेती नहीं है। राजमिस्त्री का काम ही उसकी आमदनी का जरिया है। उत्तराखंड पुलिस छुटकाई को साथ ले गई थी, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया। संवाद


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