Shahjahanpur News: बारिश ने बाढ़ प्रभावित लोगों की बढ़ाई मुसीबत

खन्नौत नदी का बढ़ रहा जलस्तर। संवाद
बीमारों को दवा और भूखों को भरपेट नहीं मिल पा रहा खाना, प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी चौपट
बारिश के कई स्थानों पर कच्चे मकान भी ढहे
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर/मिर्जापुर। गंगा की बाढ़ से मची तबाही के बीच बारिश ने छतों और खुले आसमान के नीचे जीवन-यापन कर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीमार लोगों को दवा तो बाढ़ प्रभावित लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल पा रहा है।
दो दिन से लगातार हो रही बारिश में बाढ़ क्षेत्र के जलमग्न गांवों में तमाम कच्चे-पक्के और छप्परदार घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बारिश में खुले आसमान के नीचे रह रहे बाढ़ पीड़ितों के लिए छोटे तिरपाल नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसे में भोजन बनाने की भी समस्या खड़ी हो गई है। प्रशासन की ओर से भी बाढ़ पीड़ितों के लिए कोई खास मदद नहीं मिल पा रही है।
ग्राम पैलानी निवासी अनुज ने बताया कि आश्रय स्थल में रह रहे बाढ़ पीड़ितों को तो समय से भोजन-पानी मिल रहा है, लेकिन जलमग्न गांवों की सड़कों, छतों और ईंट भट्ठों पर तिरपाल के नीचे पड़े बाढ़ पीड़ितों को दिन में एक बार भी लंच पैकेट नहीं मिल पा रहे हैं।
लगभग डेढ़ माह से जलमग्न ग्राम मस्जिद नगला के शेरुद्दीन ने बताया कि दो दिन से लगातार हो रही बारिश में गांव के सलमान, अयूब, यास्मीन आदि के कच्चे घर ढह गए हैं। पैलानी उत्तर के अनमोल ने बताया कि नीचे बाढ़ का पानी और ऊपर से बारिश के कारण ओमकार, गुड्डी पत्नी स्वर्गीय अमर सिंह, कुलदीप,सुरेश आदि के कच्चे छप्परदार घर गिर गए हैं।
प्रधान फारूक अली ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत के सभी नौ मजरे एक माह से अधिक समय से जलमग्न हैं। अब 24 घंटे से हो रही लगातार बारिश से ग्राम मोती नगला के आदेश, लोहार नगला के सुनील, आजाद नगर के सुरेश, दिलशाद,पप्पू आदि के घर गिर गए हैं।
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बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिल पा रहा इलाज
जलमग्न ग्राम पंचायत भरतपुर के प्रधान प्रतिनिधि संतोष सिंह और गुटेटी उत्तर के प्रधान अलवर सिंह ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र की बिजली कटी होने तथा बारिश में सौर ऊर्जा प्लेट से भी मोबाइल चार्ज नहीं हो पाने से सभी बाढ़ पीड़ितों के मोबाइल बंद हो गए हैं। खुले आसमान के नीचे पड़े बाढ़ पीड़ितों तक लंच पैकेट भी नहीं पहुंच पाने से हालात बहुत खराब हो गए हैं। बारिश में खुले आसमान के नीचे भीग रहे बीमार बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी दांव पर लगी हुई है। न तो बीमार बाढ़ पीड़ित ढाईगांव में आश्रय स्थल में चल रहे मेडिकल कैंप में दवा लेने पहुंच पा रहे हैं और न ही स्वस्थ्यकर्मियों की टीम जलमग्न गांवों में रोगियों को दवाएं देने जा पा रहीं हैं।
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छोटे तिरपाल के नीचे शरण लिए हुए बाढ़ पीड़ित
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ में घर जलमग्न हो जाने से सड़कों और छतों पर शरण लिए हुए हैं। अब दो दिन से हो रही बारिश में छतों, सड़कों और ईंट भट्ठों पर छोटे से तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं। कई दिनों से प्रशासन के साथ बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे समाजसेवी रिजवान अहमद ने बताया कि बारिश में भीगने और सुबह से शाम तक लगातार बाढ़ पीड़ितों की सेवा में लगे रहने से वे खुद बीमार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग के कर्मचारी नाव से जलमग्न गांवों में जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। जिससे समस्या आ गई है। फिर भी वे शाम के भोजन से किसी भी बाढ़ पीड़ित को वंचित नहीं रहने देंगे।
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गंगा का जलस्तर घटा, रामगंगा, खन्नौत और गर्रा नदी का जलस्तर बढ़ा
गंगा के जलस्तर में गिरावट आई है। जबकि रामगंगा, गर्रा और खन्नौत नदी का जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। गंगा के जलस्तर मंगलवार को 143.56 मीटरगेज था, जो कि बुधवार को घटकर 143.48 मीटरगेज हो गया। वहीं रामगंगा का जलस्तर मंगलवार को 159.880 मीटरगेज था, जो कि बुधवार को बढ़कर 159.890 मीटरगेज हो गया, गर्रा नदी का जलस्तर मंगलवार को 144.90 मीटरगेज था, जो कि बुधवार को बढ़कर 145.20 मीटरगेज हो गया, खन्नौत नदी का जलस्तर मंगलवार को 142.45 मीटरगेज था, जो कि बुधवार को 143.75 मीटरगेज हो गया है। बुधवार को नरौरा बैराज से गंगा में 1,07,213 क्यूसेक, रामगंगा में विभिन्न बैराजों से 70,859 क्यूसेक, गर्रा में दियूनी बैराज से 3,553 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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प्रशासन का दावा
बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में आश्रय स्थल पर लंच पैकेट का वितरण किया जा रहा है। मेडिकल टीम भी लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रहीं है। एसडीएम से लेकर राजस्व कर्मी भी बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में भ्रमण कर रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों की मदद के प्रयास लगातार जारी हैं।
– डॉ. सुरेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व, बाढ़ प्रभारी अधिकारी

खन्नौत नदी का बढ़ रहा जलस्तर। संवाद

खन्नौत नदी का बढ़ रहा जलस्तर। संवाद

खन्नौत नदी का बढ़ रहा जलस्तर। संवाद