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Shahjahanpur News: 650 से अधिक शैक्षणिक कर्मचारियों का वेतन रोका

Connect News 24

संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर

Updated Wed, 15 Nov 2023 12:58 AM IST

शाहजहांपुर। छात्र-छात्राओं की 50 फीसदी से कम उपस्थिति वाले 161 विद्यालयों के शैक्षणिक कर्मचारियों का नवंबर का वेतन रोक दिया गया है। जबकि 1277 विद्यालयों के प्रधानाध्याकों को 75 फीसदी से कम उपस्थिति पर चेतावनी दी गई है जिससे परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों में खलबली मच गई है। इसका विरोध भी शुरू हो गया है।

बीएसए रणवीर सिंह ने बताया कि सीएम दर्पण डैश बोर्ड पर माह अगस्त 2023 की रैकिंग जारी होने पर जिले को छात्र उपस्थिति के लिए बी ग्रेड मिला था जिस पर जिला स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में नाराजगी जताते हुए कम उपस्थिति वाले विद्यालयों को चिह्नित किया गया और पूरे स्टाफ का वेतन अगले आदेशों तक रोकने के निर्देश दिए गए। उन्हें 80 फीसदी उपस्थिति करने के लिए निर्देशित किया गया था। बावजूद सितंबर में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति काफी कम रही जिससे जिले की छवि शासन स्तर पर धूमिल हुई है। आईवीआरएस प्रणाली से प्राप्त सूचना के आधार पर 50 फीसदी छात्र उपस्थिति वाले 161 विद्यालयों के 650 से अधिक शैक्षणिक कर्मचारियों का नवंबर का वेतन रोका गया है। इनमें प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, अनुदेशक एवं शिक्षामित्र शामिल हैं। इनके अलावा 75 फीसदी से कम छात्र उपस्थिति वाले 1277 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को चेतावनी देकर सुधार के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि आगामी माह में भी सुधार नहीं हुआ तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिसके लिए शैक्षणिक कर्मचारी स्वयं जिम्मेदारी होंगे।

शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने कम छात्र उपस्थिति के लिए शैक्षणिक कर्मचारियों के वेतन को रोके जाने की कार्रवाई का विरोध किया। संघ के जिला मीडिया प्रभारी एवं भावलखेड़ा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने कहा कि यह अव्यवहारिक कार्रवाई है। वर्तमान में जिले में डेंगू का प्रकोप चल रहा है। लगभग प्रत्येक घर में लोग बीमार हैं। प्रमुख त्योहार के कारण भी बच्चों की उपस्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वहीं, यूनिफॉर्म की धनराशि अभिभावकों के खाते में पहुंच चुकी है पर अधिकांश ने बच्चों की यूनिफॉर्म नहीं बनवाई है। सरकार एवं विभागीय आदेश के अनुपालन में अभिभावक और बच्चों से यूनिफॉर्म पहनकर आने के लिए कहते हैं, इससे भी उपस्थिति कम हो जाती है। अनेक अभिभावकों ने अपने बच्चों के नाम निजी स्कूलों में बगैर जानकारी दिए लिखवा लिए हैं। कहा कि शिक्षक सदैव सरकार एवं विभाग के आदेशों का पूर्ण निष्ठा और लगन से अनुपालन करते हैं, लेकिन विद्यालय न भेजने वाले अभिभावकों के विरुद्ध भी उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाना चाहिए। केवल शिक्षक के चाहने से शत-प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति नहीं हो सकती।


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