शाहजहाँपुर

Shahjahanpur News: पाटकर सुखा दी सदानीरा कठिना, मानव-वन्यजीव संघर्ष का बढ़ा खतरा

Connect News 24

Patkar dried up the perennial difficulty, increasing the risk of human-wildlife conflict

खुटार में सूखी पड़ी कठिना नदी। संवाद

पुवायां (शाहजहांपुर)। खुटार रेंज में वन्यजीवों की लाइफ लाइन कही जाने वाली कठिना नदी को अवैध कब्जे और तट तक खेती कर सुखा दिया गया है। ऐसे में भीषण गर्मी में पानी के लिए वन्य जीव आबादी और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

खुटार रेंज का जंगल लखीमपुर की किशनपुर सेंचुरी से होते हुए दुधवा नेशनल पार्क और बंडा क्षेत्र में दिउरिया रेंज से मिलकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व से जुड़ा है। खुटार रेंज की फत्तेपुर वीट से होते हुए लखीमपुर की महेशपुर रेंज तक कठिना नदी वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी रही है। कभी इस नदी में भरपूर पानी रहता था। बाघ, तेंदुआ सहित तमाम वन्यजीव नदी के पानी से ही प्यास बुझाते थे। इसके दहारे (नदी किनारे के दलदली और घनी झाड़ियों, बेंती के स्थान) में पड़े रहते थे।

अब कठिना नदी के किनारों तक अवैध कब्जे कर लोगों ने खेती करनी शुरू कर दी है। इससे नदी में पानी ही नहीं रह गया है। खेतों में डाले जाने वाले कीटनाशक नदी में पहुंचने से जलीय जंतु भी नहीं रह गए हैं। कई जगह नदी में घास उग आई है। जंगल में नदी कभी नहीं सूखती थी, लेकिन इस बार इसमें पानी नहीं है।

पानी की तलाश में बाघ, तेंदुआ सहित तमाम वन्यजीव खेतों में आ रहे हैं। यहां नलकूप आदि की हौद में पानी मिल जाता है। इसके अलावा गन्ने के खेतों में शिकार भी आसानी से मिल जाता है। यहीं कारण है कि वन्यजीव जंगल के बजाय खेतों को ठिकाना बनाने लगे हैं। यही वजह है कि किसानों पर वन्यजीवों के हमले बढ़ गए हैं।

कहां जाएं बेघर बाघ, तेंदुआ

खुटार रेंज का जंगल कभी बेहद घना था। यहां कोरों, सागौन, महुआ, पीपल, बरगद के अलावा छोटे पौधों में रोहनी, करौंदा, तेंदू आदि की भरमार थी। अब कोरों और सागौन के पेड़ ही रह गए हैं। इसमें भी तमाम पेड़ टहनी विहीन हो गए हैं। लकड़ी काटने वालों ने टहनियों को काट कर बेच डाला है। अब पेड़ काटे जा रहे हैं। बाघ, तेंदुआ सहित अन्य वन्यजीवों के प्रवास स्थल पर रोजाना सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं, इस कारण वन्यजीव जंगल से निकल कर खेतों में पहुंच रहे हैं।

मोहनपुर, महुआ के बाद अब छापाबोझी में दिखा तेंदुआ

छह जून को घास काटने गए गांव मोहनपुर के रामकुमार मिश्रा पर तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया था। इसके बाद सात जून को गांव महुआ पिमई में किसान जितेंद्र कुमार पर हमला कर घायल कर दिया था। अब गांव छापाबोझी में तेंदुए ने बछड़े को मार डाला है। तीनों ही गांव दूर-दूर हैं। इससे आशंका है कि कई तेंदुए खेतों में घूम रहे हैं। इसके अलावा दस जून को गांव नवाजपुर में एक हिरन खेतों में आ गया था। बाद में वह मृत मिला। गांव का एक युवक हिरन के सींग भी काट ले गया था।

दुधवा में कार्रवाई, खुटार में लापरवाही

बाघों और तेंदुए की मौत में दुुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर सेंचुरी में वन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। माना गया है कि अधिकारी, कर्मचारी वन्य पशुओं की निगरानी ठीक से नहीं कर सके। खुटार रेंज में बाघ और तेंदुए देखे जाने पर भी भारी लापरवाही बरती जा रही है। रेंजर और वनकर्मी लोगों को समझाने तक ही अपनी ड्यूटी समझते हैं। हिरन के मरने के बाद युवक सींग काट ले गया। अगर मौके पर बना वीडियो वायरल न होता तो यह मामला भी दबा दिया जाता है। लापरवाही के चलते खुटार रेंज में भी बड़ी घटना हो सकती है।


Connect News 24

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button