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Shahjahanpur News: रामगंगा नदी में तीन युवक बहे, एनडीआरएफ को तलाश में लगाया

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Three youths drowned in Ramganga river, NDRF engaged in search

मिर्जापुर में युवकों के नदी में डूबने के बाद रोते-बिलखते परिजन

– ससुराल आए सोनू ने पत्नी से विवाद के बाद रामगंगा नदी में छलांग लगाई

– उसकी तलाश में नदी में उतरे पांच युवकों में दो बहे, सुराग नहीं लगा

संवाद न्यूज एजेंसी

मिर्जापुर (शाहजहांपुर)। बदायूं जिले के हजरतपुर थाना क्षेत्र के गांव रुंध निवासी सोनू (28) ने पत्नी से विवाद होने के बाद सोमवार को रामगंगा नदी में छलांग लगा दी। उसकी तलाश में नदी में पांच युवक कूदे तो वे भी बहने लगे। तीन को तो बचा लिया गया लेकिन दो का पता नहीं चला। युवकों की तलाश के लिए एनडीआरएफ टीम ने प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

सोनू का विवाह कलान थाना क्षेत्र के गांव चौंरा बगरखेत निवासी तुलसी के साथ हुआ था। तुलसी इन दिनों मायके आई हुई थी। चार दिन पहले सोनू पत्नी को विदा कराने के लिए आया था। सोमवार को घर चलने को लेकर दंपती में विवाद हो गया। कहा-सुनी होने पर नाराज सोनू ने गांव के नजदीक बह रही रामगंगा नदी में छलांग लगा दी। ससुरालियों ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका।

पुलिस भी मौके पर पहुंची। मंगलवार सुबह चौंरबगर खेत के तेजवीर, धर्मवीर, कल्लू, संदीप, अरुण कुमार, नन्हें, सचिन, ओमकार समेत कई युवक सोनू की तलाश में लगभग छह किलोमीटर दूर मिर्जापुर थाना क्षेत्र के गांव गाजीपुर चिकटिया के मजरा मड़ैयां गांव पहुंचे। इस बीच धर्मवीर, सचिन और ओमकार समेत पांच युवक उसकी तलाश में उफनाती रामगंगा नदी में कूद गए।

नदी में पानी अधिक होने के कारण पांचों युवक बहने लगे। नदी के किनारे खड़े युवकों का शोर सुनकर आसपास के ग्रामीणों ने तीन युवकों को तो बचा लिया पर सचिन और ओमकार नदी में बह गए।

फ्लड यूनिट ने देर शाम तक की तलाश

तीन युवकों के बहने के चलते फ्लड यूनिट को भी बुला लिया गया। देर शाम तक फ्लड यूनिट ने तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लग सका। मजबूरी में रात में अभियान को रोक दिया गया।

गांव में मातम, परिवार के लोगों के नहीं थम रहे आंसू

तीन युवकों के नदी में बहने के बाद से गांव में मातम छाया हुआ है। सोनू के घर से भी लोग आ गए हैं। परिजनों की आंखाें से आंसू नहीं थम रहे हैं। सचिन कक्षा नौ का छात्र था। वह चार भाइयाें में दूसरे नंबर का था। सचिन के पिता रतनपाल नोएडा में नौकरी करते हैं। उसकी मां ममता, भाई सूर्यांश, शिवम, अर्पित का रो-रोकर बुरा हाल है।

इसी तरह ओमकार की मां लक्ष्मी भी बेटे को याद कर बेहाल है। वह दिव्यांग है। लक्ष्मी के पति भरतपाल की कुछ समय पहले मौत हो चुकी है। पति की मौत के बाद बेटे के चले जाने से उसके ऊपर वज्रपात टूट पड़ा है।


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