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…तो सही थे हिंडनबर्ग के आरोप! अडानी की कंपनी पर गहरा संदेह, अटकल को ये बात खल गई

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भारतीय अरबपति गौतम अडानी (Gautam Adani) और विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करने वालों की एक मुसीबत खत्म नहीं होती कि दूसरा शुरू हो जाता है। हिंडनबर्ग के झूठ के बाद सेबी की जांच का सामना कर रहे अडानी समूह को अब एक नया झटका लगा है। यह झटका लग रहा है अदानी ग्रुप की कंपनी अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन) को।

मोटापे की पूरी गारंटी नहीं है

दरअसल ताजा मामले में अडानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) के ऊपर उसकी कंपनी को पूरी तरह से गारंटी नहीं दी जा रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट की बात तो अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन ने अपनी शॉकर कंपनी डिलॉयट हैसकिन्स एंड सेल्स एल एल एलबी (डेलोइट हास्किन्स एंड सेल्स एलएलपी) को कुछ लेन-देन के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है।

इन 3 बॉडी के साथ लेन-देन

रिपोर्ट के अनुसार, डिलॉयट हैसकिन्स एंड सेल्स एल ऑल ऑल ने अदानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन की तीन बॉडी के साथ लेन-डेन पर मंगलवार को अपनी चिंता व्यक्त की। अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक्स जोन का कहना है कि ये तीनों निकाय अनरिलेटेड पार्टीज हैं, यानी उनकी कंपनी के साथ संबंध नहीं है। वहीं आहतर का कहना है कि वह संबंधित शरीर से संबंधित होने की बात को कंफर्म नहीं कर सकते हैं। झटके ने यह भी कहा कि स्वतंत्र बाहरी जांच से इसकी पुष्टि करने में मदद मिल सकती थी, लेकिन अडानी पोर्ट्स ने उसके लिए मना कर दिया।

पहली बार सीमित सीमित समीक्षा

डिलोयट हैसकिन्स एंड सेल्स एलएपी का कहना है कि उन्होंने जो मूल्यांकन किया है, उसमें कितना अधिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं थी। ऐसे में कॉलर ने कहा कि कंपनी यानी अडानी पोर्ट्स पूरी तरह से स्थानीय कानूनों का पालन नहीं कर रहा है, इस बारे में टिप्पणी करना मुश्किल है। यह पहली बार है जब अदानी समूह को मैटर से क्वालिफाइड ओपिनियन यानी सीमित समीक्षा मिली है।

पैसा रीलों

हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया था

अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने 24 जनवरी को अडानी ग्रुप पर कई आरोप लगाए थे। हिंडनबर्ग के जेम में यह भी कहा गया था कि अडानी समूह के साझेदारों ने प्राधिकरण के माध्यम से पैसे ले लिए हैं। यह मेल भारत में राजनीतिक रंग भी चुका चुका है। हिंडनबर्ग के जेरेमा के बाद अडानी समूह को भारी नुकसान हुआ, जिसका अब तक कोई धोखा नहीं हुआ। दूसरे ओर के सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में बाज़ार सेबी अडानी समूह पर हिंडनबर्ग अनुसंधान के अनुमानों पर झूठ की जाँच कर रहा है।

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