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एनपीएस के सब्सक्राइबर्स को होगा जबरदस्त फायदा, पीएफआरडीए ने शुरू किया इस तरह का काम

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नेशनल पेंशन सिस्टम (नेशनल पेंशन सिस्टम) यानी एनपीएस (एनपीएस) के सब्सक्राइबर्स को जल्द ही एक शानदार खबर मिलने वाली है। पेंशन फंड रेगुलेटरी और अवलोकन चित्रण (पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण) यानी पीएफआरडीए (पीएफआरडीए) एनपीएस की न्यूनतम बीमा रिटर्न योजना (न्यूनतम सुनिश्चित रिटर्न योजना) की शुरुआत कर रहा है। पीएफआरडीए के अकाउंट (पीएफआरडीए अध्यक्ष) ने हाल ही में एक साक्षात्कार में इसकी जानकारी दी है।

लागत बढ़ने का खतरा होगा

पीएफआरडीए के खाते दीपक मोहंती (पीएफआरडीए के अध्यक्ष दीपक मोहंती) ने मनी कंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पेंशन फंड करार एनपीएस के मिनिमम एश्योर्ड रिटर्न का निर्धारण यानी एमएआरएस (MARS) पर काम कर रहा है। इसे निकट भविष्य में शुरू किया जा सकता है। हालांकि इससे एनपीएस के सब्सक्राइबर्स के लिए लागत में भी बढ़ोतरी होगी। मोहंती ने कहा कि न्यूनतम रिटर्न की वजह से एनपीएस की लागत भी तय की गई है।

इस कारण एनपीएस लोकप्रिय है

अभी के समय में एनपीएस की बात करें तो इसे पसंद किए जाने का सबसे बड़ा कारण कम लागत वाली संरचना है। यदि लागत बढ़ती जा रही है तो न्यूनतम रिटर्न्स एक साथ जुड़ते जा रहे हैं, तो इसकी कुछ प्रतिनियुक्ति प्रभाव दिखाई दे सकता है। अभी एनपीएस के तहत अगर एसेट अंडर 10 हजार करोड़ रुपये से कम हो तो पेंशन फंड मैनेजर ज्यादा से ज्यादा एसेट के 0.09 प्रतिशत तक का शुल्क ले सकता है।

अभी ऐसी है एनपीएस की लागत

वहीं आपकी संपत्ति 10 हजार करोड़ रुपये से 50 हजार करोड़ रुपये तक होने पर जांज कुल संपत्ति के अधिकतम 0.06 प्रतिशत के बराबर हो सकती है। इसी तरह का एसेट अंडर अगर 50 हजार करोड़ रुपये से 1.50 लाख करोड़ रुपये तक हुआ तो कुल संपत्ति के 0.05 प्रतिशत के बराबर चार्ज लग सकता है। वहीं कुल संपत्ति 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने पर अधिकतम शुल्क की सीमा संपत्ति के 0.03 प्रतिशत के बराबर है।

इन चीजों का बैलेंस बनाना जरूरी है

पीएफआरडीए का मानना ​​है कि कम लागत वाले पेंशन फंड के पास सही से पूंजी नहीं है। अगर इनके साथ परस्पर संबंध जुड़ा है तो परिदृश्य बदल सकता है। ऐसे में अतिरिक्त पूंजी। उन्होंने कहा कि रिटर्न्स को इतना आकर्षक रखना होगा कि वे सब्सक्राइबर्स को अपनी तरफ खींच लें। इसके साथ-साथ लागत और जोखिम को भी ध्यान में रखना होगा। बकौल मोहंती, जोखिम, लागत और रिटर्न को बैलेंस बनाए रखने की जरूरत होगी।

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