चमकी के खिलाफ लड़ाई अभी नहीं हुई खत्म, अल नीनो फैक्टर टूट सकता है खेल!
महंगाई के खिलाफ युद्ध: भले ही अप्रैल महीने में दर्ज दर घटक 18 महीने के निचले स्तर 4.70 प्रतिशत पर घटक अटक गए हों, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर अधिकारकांत दास ने झलक से आगाह करते हुए फिर बड़ी चेतावनी दी है। आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि उसके खिलाफ जंग अभी खत्म नहीं हुई है और सेंट्रल बैंक अल नीनो फैक्टर पर नजर रखते हुए चेतावनी दे सकता है।
गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, मौजूदा स्थिति बहुत ही तेज है और हर किसी के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। ऐसे में हमें सतर्क रहने की ट्रेन है। आत्मसंतोष का कोई कारण नहीं है, हमें यह दृश्य होगा कि अल नीनो कारक जिसकी आशंका जाहिर की जा रही है, वो किस प्रकार अपना प्रभाव दिखाता है।
मानसून विभाग ने इस साल सामान्य बारिश का अनुमान लगाया है। लेकिन कई शोध रिपोर्टों का मानना है कि इस साल अल नीनो के प्रभाव के कारण ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिससे खाद्यान्न उत्पादन में कमी आ सकती है। अमेरिका से जुड़ी संस्था एमओएए (नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन) जून से दिसंबर 2023 के बीच अल नीनो के आगमन की संभावना है। इससे भारत में मैगजीन पर असर पड़ सकता है।
वित्त मंत्रालय ने जनवरी महीने के लिए जो मंथली इकोनॉमिक रिव्यू जारी किया था उसमें मौसम से संबंधित जानकारी देने वाली शिकायतों की भविष्यवाणी के बारे में आशंका जाहिर की गई थी कि भारत में अल नीनो जैसी स्थिति को देख सकते हैं। अगर ये भविष्यवाणी सच साबित हुई तो बारिश में कमी देखने को मिल सकती है। इससे कृषि उत्पाद कमतर रह सकते हैं जिससे किसी व्यक्ति के संबंधों में कोई करीबी नजर आ सकता है।
अल नीनो प्रशांत महासागर की समुद्री सतह के तापमान में समय-समय पर होने वाले हैं, जिसका प्रभाव समुद्र पर दिखाई देता है। अल नीनो की वजह से ताप गर्म होता है। अल नीनो के कारण ठंड के मौसम में भी गर्मी रहती है, जबकि गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ जाता है और विघटन जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। इसके प्रभाव से बारिश होने वाले क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिलता है। कम बारिश वाली जगहों पर ज्यादा बारिश होती है।
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