पीलीभीत

स्ट्रीट लाइट: करोड़ों के घोटाला में मुकदमा दर्ज कराने में अफसरों के कांप रहे हाथ

Connect News 24

पीलीभीत। ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये से स्ट्रीट लाइटें लगवाने में की गई घपलेबाजी की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई तो कार्रवाई की पत्रावली विकास भवन के जिम्मेदारों के कार्यालयों के ही चक्कर काटती रह गई। अब डीएम ने मामले में कार्रवाई की संस्तुति कर दी फिर भी जांच के नाम पर पत्रावली को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।

तत्कालीन डीएम पुलकित खरे के कार्यकाल में ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइट लगाने में गड़बड़ी की बात सामने आई थी। शासन तक मामला पहुंचा तो जिले की 720 ग्राम पंचायतों की जांच कराई गई। इनमें 249 में गड़बड़ी सामने आई। जांच में पता चला कि मानकों के अनुसार लाइट नहीं लगाई गईं। बाजार से सस्ती स्ट्रीट लाइटें खरीदकर लगा दी गईं, जबकि बिल का भुगतान स्टैंडर्ड कंपनी के हिसाब से कराया गया।

बाजार में जो स्ट्रीट लाइट 600 से 700 रुपये में मिलती है, उसकी कीमत दो हजार रुपये से ज्यादा दिखाई गई। जिले में करीब ढाई करोड़ की स्ट्रीट लाइटें लगाई गईं। हैरत की बात यह रही कि किसी अधिकारी ने खरीद प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया और ठेकेदार का भुगतान करा दिया गया।

जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद संबंधित ग्राम पंचायत के प्रधान, सचिव और एडीओ पंचायत की जिम्मेदारी तय की गई। इसके बाद जांच रिपोर्ट पर प्रधानों और सचिवों को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के बाद कार्रवाई के लिए पत्रावली विकास भवन के जिम्मेदारों के कार्यालयों में चक्कर काट रही है। अभी इसमें कुछ नहीं हो सका है।

249 ग्राम पंचायतों में मिला था घपला

स्ट्रीट लाइट घोटाले में प्रशासन प्रधानों और सचिवों से रिकवरी कराने के मूड में है। इस मामले में एडीओ पंचायत, प्रधान व सचिव को नोटिस भेजे गए थे। आधे अधूरे जवाब ही अधिकारियों को मिल सके हैं। जांच के दौरान जिले की 249 ग्राम पंचायतों में घोटाला सामने आया था। मामला खुलने के बाद पटल के एक कर्मी की ओर से फाइल को तैयार किया गया तो उसमें कई लोगों को बचाते हुए रिपोर्ट तैयार की गई थी। इसके चलते सीडीओ ने पत्रावली को वापस कर दिया था। इससे पटल पर मौजूद एक बाबू की संलिप्तता भी उजागर होने लगी थी।

बचाने के नाम पर शुरू कर दिया वसूली का खेल

अभी तक हुई जांच में 249 ग्राम पंचायतों में से 180 पंचायतें दोषी पाई है। यहां के लोगों पर ही कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। पूर्व में जांच रिपोर्ट पटल पर मौजूद एक बाबू की ओर से सचिव और प्रधानों से बचाने के नाम पर वसूली का खेल शुरू कर दिया गया। बताते है कि दस हजार में क्लीनचिट देने का सौदा कर दिया गया। इसके बाद बचाव करते हुए रिपोर्ट सीडीओ को भेज दी गई। सीडीओ ने एक समान आरोप में अलग-अलग कार्रवाई को पकड़ लिया था। इस पर पत्रावली को वापस कर दी। इसके बाद डीपीआरओ की जांच रिपोर्ट पर भी डीडीओ को फाइल भेज दी गई। डीडीओ की ओर से फाइल मिलने पर सीडीओ ने डीएम को भेज दी। डीएम ने कार्रवाई की संस्तुति भी कर दी। करीब एक माह होने को है फिर भी कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो सका है।

जांच प्रक्रिया पूरी हो गई है। 180 पंचायतों में घपला किया गया है। इन पर कार्रवाई होना है। डीएम की ओर से भी संस्तुति कर दी गई है। अलग-अलग पंचायतों पर कार्रवाई के लिए पेपर तैयार हो रहे है। इसके बाद डीएम के पास भेजे जाएंगे। जल्द ही इसमें कार्रवाई अमल में आ जाएगी। – वाचस्पति झा, डीपीआरओ


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