बाबा भोले… नाम निराले: भूमि फोड़कर प्रकट हुए तो नाम पड़ा भुइफोरवानाथ; इन मंदिरों की है ये पहचान

लखीमपुर स्थित भुइफोरवानाथ मंदिर
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देवाधिदेव महादेव को उनके भक्त भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि प्रचलित नामों से तो पुकारते ही हैं। पुराणों में उल्लिखित 108 नामों का भी अक्सर जप करते हैं। मगर जिस तरह से अपने बाबा स्वभाव और स्वरूप से निराले हैं, भक्तगण उनके शिवालयों का नामकरण भी उसी तर्ज पर कर देते हैं। बरेली और आसपास के जिलों में कई ऐसे शिवालय हैं, जो अपने विचित्र नाम की वजह से चर्चित हैं। सावन में कुछ निराले नाम वाले शिवालयों से आपको रूबरू करवा रहे हैं।
भूमि फोड़कर प्रकट हुए तो नाम पड़ा भुइफोरवानाथ
लखीमपुर खीरी शहर में स्थित प्राचीन भुइफोरवानाथ शिव मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग भूमि फोड़कर प्रकट हुआ था। महेवा स्टेट की स्थापना के समय यहां घना जंगल हुआ करता था। राज्य स्थापना के साथ जब जंगल का कटान शुरू हुआ तो यहां भूमि में धंसा शिवलिंग दिखाई दिया।
महेवा स्टेट के शासकों ने इस शिवलिंग को महेवा गढ़ी में स्थापित करने के लिए शिवलिंग को उठाना चाहा, लेकिन उठाया नहीं जा सका। खोदने का प्रयास किया गया तो काफी गहराई के बाद भी इसका अंत नहीं मिला। इस पर महेवा स्टेट के शासकों ने इस शिवलिंग को वहीं स्थापित कर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। नाम भुइफोरवानाथ रखा। मंदिर एक विशाल और ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है।