बरेली में बवाल: माहौल बिगाड़ने की थी साजिश… पथराव के लिए छतों पर पहले से जमा थे पत्थर; इसलिए बिगड़ गई बात!

bareilly clash
– फोटो : अमर उजाला
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बरेली में कांवड़ियों के जत्थे पर पथराव अनायास ही नहीं हुआ। इसके पीछे सोची-समझी रणनीति थी। इबादत स्थल में मौजूद लोगों के हाथ से लेकर घरों की छतों तक में पत्थर और बोतलें थीं। इसी से कांवड़ियों को निशाना बनाया गया। पूरे घटनाक्रम में पुलिस बल की कमी और खुफिया अमले की नाकामी साफ नजर आई।
गोपाल नगर गोसाई गौटिया से जोगी नवादा के वनखंडीनाथ शिवालय तक का रास्ता मिश्रित आबादी की संकरी गलियों से होकर गुजरता है। इबादत स्थल के आसपास पहले भी कांवड़ यात्रा को लेकर तनातनी हो चुकी है। बताते हैं कि इस घटनाक्रम के मुख्य सूत्रधार पूर्व पार्षद उस्मान अल्वी की भूमिका 2012 में भी थी।
तब भी वहां कांवड़ियों से मारपीट और उनको विदा करने आ रहीं महिलाओं से अभद्रता की गई थी। सपा सरकार में तत्कालीन पार्षद उस्मान के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ था। उसके बाद भी हर साल कभी कांवड़ के वाहनों की संख्या तो कभी डीजे की आवाज को लेकर तनातनी होती रही है।
चूंकि पिछले सोमवार को इससे बड़ा जत्था इसी रास्ते से गुजारा जा चुका था। इसलिए इस बार पुलिस-प्रशासन बेहद मुतमइन था कि विरोध या बवाल नहीं होगा। थाना प्रभारी के साथ सीमित संख्या में पुलिसकर्मी थे। इस बीच पथराव हुआ तो पुलिस लोगों को समझाती ही रह गई।



