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सिल्वर लोन के लिए नहीं हैं स्पष्ट नियम, आरबीआई से बैंक करने वाले ये मांगते हैं

Connect News 24

पिछले कुछ समय में सिल्वर (चांदी) और चांदी के जेवर (चांदी के आभूषण) के मामले में तेजी आई है। इस कारण सर्राफा बिजनेसमैन (बुलियन ट्रेडर्स) चांदी की खरीद और उसके जेवर बनाने के लिए बड़े कर्ज की लगातार मांग कर रहे हैं। हालांकि चेतावनी के स्पष्ट नहीं होने के कारण कारणों से कोई परेशानी हो सकती है। इसे देखते हुए संबंधित ने प्राधिकरण से गोल्ड मेटल लोन (गोल्ड मेटल लोन) की तरह सिल्वर मेटल लोन (सिल्वर मेटल लोन) के लिए भी निर्देश व दिशा निर्देशों को स्पष्ट करने की मांग की है।

सूक्ष्म के प्रकट होने की बात

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में रूखेपन के बारे में बताया गया है कि पिछले एक साल में सिल्वर के दावे में काफी तेजी आई है। यही कारण है कि देश के सर्राफा सदस्य, सिल्वर और चांदी के राशन को खरीदते हैं तथा कुछ जेवर बनाने के लिए शेयरों से कर्ज की मांग कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि बैंकों ने पिछले महीने एक बैठक में रिजर्व बैंक के खाते जमा करने का फैसला लिया था।

कर्ज काफी मांग में है

खबर के मुताबिक, सिल्वरी का दावा 25 हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंचा है। इस सेक्टर में कर्ज की काफी मांग है। ऐसे में सोने की खरीदारी और सोने के जेवरों के निर्माण के लिए कर्ज देने की स्पष्ट रूपरेखा है, ठीक उसी चांदी के मामले में भी तैयार करने की जरूरत है। आरक्षित बैंक की मौजूदा सूचनाओं के अनुसार, नामित व्यक्तियों को सोना आयात करने का अधिकार मिला है। जो बैंक गोल्ड मनीटाइजेशन 2015 में शामिल हैं, वे सोने के जेवरों का दावा करने वाले या इन्हें बनाने वाले घरेलू कारोबारियों को गोल्ड मेटल लोन दे सकते हैं।

यहां गहनता के अलावा भी इस्तेमाल किया गया है

सिल्वर भी सोने की तरह के घोल में गिनी जाती है। चांदी के आभूषणों के अलावा बड़े पैमाने पर औद्योगिक उपयोग किया जाता है। इस वजह से सिल्वर के ऊपर सोने के अलावा इंस्टिट्यूट जैल के प्रभाव भी प्रभावित होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग जगत के कई लोगों का मानना ​​है कि चांदी के जेवरों का निर्माण और उनके जैसा दिखता है, जैसा सोने के गहनों का है। ऐसे में अगर सेंट्रल बैंक स्पष्ट निर्देश बनाता है तो मैन्युफैक्चरर या ट्रेडर मौजूदा चेतावनी का उल्लंघन नहीं करेगा।

आगे भी बने रहेंगे

जेम ज्वेलरी एक्सपोर्ट काउंसिल प्रमोशन यानी जीजेईपीसी के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान चांदी के रेवरों का आंकड़ा 16.02 प्रतिशत बढ़कर 23,492.71 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। साल भर पहले चांदी के 20,248.09 करोड़ रुपये के गहनों का पता लगाया गया था। चांदी के बाजार में आने वाले वर्षों के दौरान भी तेजी से टिके रहने की उम्मीद है।

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