अज मेरे पिता दी आत्मा नू शांति अते न्याय मिलया : अर्जुन

सुखजीत सिंह की मां वंश कौर। फाइल फोटो। संवाद
पुवायां (शाहजहांपुर)। ‘मैं कोर्ट दा धन्यवाद करदा हां, ते जज साहब अते एसपी नू धन्यवाद दिंदा हां। ओना ने आ बहुत ही बदिया फैसला कित्ता। अज मेरे पिता दी आत्मा नू शांति अते न्याय मिलया है, जो जिद्दा दा करेगा,ओददां दा ही भरेगा।’ यह प्रतिक्रिया थी उस बेटे की जिसके पिता की हत्या में दोषी मां को बीते दिन फांसी की सजा सुनाई गई है। क्षेत्र के बहुचर्चित सुखजीत हत्याकांड में बीते दिन ही कोर्ट ने उसकी पत्नी रमनदीप कौर को फांसी और गुरप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। घटना के समय अर्जुन दस साल का था और पिता की हत्या का चश्मदीद था। उसने कोर्ट में घटना की रात की सच्चाई बयान की थी। अर्जुन की गवाही मामले में बेहद महत्वपूर्ण रही। घटना के अगले दिन वह छोटे भाई एमन के परेशान होने के कारण बिल्कुल नहीं रोया था और भाई को सांत्वना देता रहा था। वह इस समय अर्जुन और उसका भाई एमन इंग्लैंड में रहकर पढ़ाई कर रहा है। अर्जुन कोर्ट की हर पेशी पर दादी वंश कौर से बात कर मुकदमे की जानकारी लेता था। रमनदीप कौर को फांसी की सजा की होने पर दादी वंश कौर ने अर्जुन को कोर्ट के फैसले की जानकारी मोबाइल पर दी।
पीछे नहीं हटूंगी, आखिरी दम तक लडूंगी न्याय की लड़ाई
बंडा। पुत्र सुखजीत सिंह के हत्यारे गुरप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू और बहू रमनदीप कौर को सजा के लिए जमकर संघर्ष करने वाली वंश कौर कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं।
रमनदीप और मिट्ठे के वकीलों के हाईकोर्ट में अपील करने की बात पर उन्होंने कहा कि यदि रमनदीप और मिट्ठू बचाव के लिए हाईकोर्ट कोर्ट का सहारा लेंगे तो मैं भी वकील करके उनको बचाव का मौका नहीं दूंगी। रमनदीप और मिट्ठू जिस भी कोर्ट में जाएंगे, वहां वह भी पैरवी करेंगी। पुत्र के हत्यारों पर कोई दया नहीं की जाएगी और सजा दिलाकर रहेंगी। संवाद
इंग्लैंड और कनाडा से आए रिश्तेदार
बंडा(शाहजहंपुर)। सुखजीत सिंह हत्याकांड पर फैसले के बाद इंग्लैंड के डर्बी से उसके बहनोई कुलदीप सिंह टुरना के छोटे भाई तरसेम सिंह अपने फुफेरे भई कनाडा के देवेंद्र सिंह के साथ बसंतापुर स्थित फार्म हाउस पर पहुंचे। दोनों ने कहा कि कोर्ट ने सही फैसला दिया है। इससे साफ है कि भारत में न्यायपालिका कितनी सुदृढ़ है।
तरसेम सिंह ने बताया कि उनके भाई कुलदीप सिंह ने सुखजीत सिंह को पुत्र की तरह पाला और इंग्लैड में उच्च शिक्षा दिलाई। सुखजीत के हत्यारों को सजा दिलाने में उनके भाई कुलदीप सिंह का भी बहुत योगदान रहा है। इसके अलावा गांव बसंतपुर के ही दलजीत सिंह भी लगातर मदद में लगे रहे। उन्होंने पुलिस, कोर्ट और मुसीबत में मदद करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद भी दिया है।
तरसेम सिंह ने बताया कि इंग्लैंड में अर्जुन डर्बी में ही इंटर और एमन हाईस्कूल का छात्र है। दोनों पुरानी बातें भुलाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने में लगे हुए हैं। सुखजीत के दूसरे बहनोई हरविंदर सिंह ने कहा कि रमनदीप की फांसी और मिट्ठू की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखवाने के लिए वह लोग आगे भी कोर्ट में पैरवी करेंगे और पूरी नजर रखेंगे।
रमनदीप पर हद से ज्यादा भरोसा करना पड़ा सुखजीत को भारी
हमले के बाद हुआ था चौकन्ना, लेकिन खा गया धोखा
पुवायां। रमनदीप कौर पर हद से ज्यादा भरोसा और पहले जान लेने की कोशिश को भुलाना सुखजीत सिंह को बहुत भारी पड़ा।
22 अगस्त 2016 को रमनदीप ने सुखजीत पर हमलाकर जान लेने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर घायल सुखजीत बच गए और शाहजहांपुर जाकर इलाज कराने के बाद मां और अन्य लोगों को इस बात की जानकारी नहीं दी कि हमला रमनदीप कौर ने किया है। मां को बताया गया कि हमला शाहजहांपुर से घर लौटते समय अज्ञात लोगों ने किया है। इसके बाद मां वंश कौर ने अगले ही दिन सुखजीत को नई स्कार्पियो खरीदकर दी थी, जिससे पुत्र और बहू सुरक्षित रह सके। सुखजीत इसके बाद चौकन्ना रहने लगा था। उसे उम्मीद नहीं थी कि रमनदीप और मिट्ठू उसकी जान ले लेंगे। संवाद
घरवालों को छोड़ शादी करने से बढ़ा था भरोसा
डर्बी में रहने के दौरान सुखजीत सिंह और रमनदीप का प्यार परवान चढ़ा तो रमनदीप के परिजन इसके विरोध में आ गए। कारण था रमनदीप जाट और सुखजीत कंबोज सिख थे। रमनदीप ने अपने परिवार की मर्जी के सुखजीत से शादी की तो सुखजीत उस पर आंख बंद कर भरोसा करने लगा था।

सुखजीत सिंह की मां वंश कौर। फाइल फोटो। संवाद

सुखजीत सिंह की मां वंश कौर। फाइल फोटो। संवाद

सुखजीत सिंह की मां वंश कौर। फाइल फोटो। संवाद

