बदायूं

Budaun News: हाईस्कूल के टॉप फाइव

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भाई ने छोड़ी पढ़ाई तो बढ़ा पाए आगे

म्याऊं। गांव बबई भटपुरा निवासी रामजी ने 94.67 प्रतिशत अंक के साथ जिले में दूसरा स्थान हासिल किया है। रामजी एक सामान्य मध्यम श्रेणी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। रामजी के पिता की दो वर्ष पूर्व बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी। इसके बाद रामजी बड़े भाई छवि राम के साथ खेती में हाथ बंटाने लगे। रामजी पांच भाई बहन है, जिसमें वह सबसे छोटे है। रामजी ने बताया कि उनकी पढ़ाई जारी रहे, इसके लिए बड़े भाई ने खुद की पढ़ाई छोड़ दी। हालांकि रामजी पढ़ाई के साथ-साथ खेतीबाड़ी में अब भी भाई का हाथ बंटाते हैं।

कनिष्का ने किया नगर का नाम रोशन

बिल्सी। नगर के मोहल्ला संख्या दो निवासी पत्रकार रविंद्र रवि की पुत्री कनिष्का सेन ने हाईस्कूल की परीक्षा में जिले में चौथा स्थान हासिल किया हैं। कनिष्का सेन भूदेवी वार्ष्णेय इंटर कॉलेज की छात्रा है। उन्होंने बताया कि वह इंजीनियर बनकर देश की सेवा करना चाहती है। वह करीब पांच घंटे अध्ययन करती थी। उसके एक छोटा भाई आरके लक्ष्य है। उनकी मां सुमन एक गृहणी है। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने सभी शिक्षकों, कॉलेज प्रबंधक सुरेश बाबू गुप्ता व प्रधानाचार्य प्रदीप कुमार शर्मा को देती हैं। उनकी सफलता से उनकी दादी रामबेटी, चाची रानी, चाचा संजीव राणा में खुशी का माहौल है।

तीसरे नंबर पर आने पर हुई मायूस

बिसौली। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्रा छवि गुप्ता के पिता राकेश कुमार हरिद्वार में रहकर प्राइवेट नौकरी करते है। मंगलवार को रिजल्ट आने की सूचना पर वह अपने भाई राजेश के साथ स्कूल पहुंची थी। जब रिजल्ट आया तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि वह तीसने नंबर पर आयी। उनका कहना है कि उनकी परीक्षा बेहतर हुई थी। उन्हें जिले में पहले स्थान पर आने की उम्मीद थी। उन्होंने बताया भाई के साथ मां आशा गुप्ता भी पढ़ाई में उनकी मदद करते है।

सोशल मीडिया से रहते हैं दूर

बदायूं। शहर के मोहल्ला महाराज नगर निवासी भोजराज पाल के बेटे नीरज पाल ने जिलें पांचवा स्थान हासिल किया है। उनके पिता दिल्ली में रहकर प्राइवेट नौकरी करते हैं। नीरज पाल का कहना है कि वह आईएएस बनना चाहते हैं। इसको टारगेट बनाकर पढ़ाई कर रहे हैं। यहां तक उन्होंने सोशल मीडिया से भी दूरी बनाए रखी थी। वह अधिकांश समय पढ़ाई में लगाते थे। हालांकि इस दौरान उन्होंने अंग्रेजी, गणित और विज्ञान की कोचिंग जरूर लगाई थी, लेकिन रोजाना रात को सोने से पहले अगले दिन का शेड्यूल निर्धारित करते थे। उसके हिसाब से ही पढ़ाई करते थे।


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