कोरोना काल में चिकित्सकों के कार्य डब्ल्यूएचओ ने भी सराहे : डॉ. शरद
शाहजहांपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यूपी स्टेट (आईएमए) के तत्वावधान में दो दिवसीय 88वें यूपीकॉन-2023 के पहले दिन प्रदेशभर से आए करीब 350 चिकित्सकों ने शिरकत की। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शरद अग्रवाल ने कहा कि कोरोना काल में चिकित्सकों ने जान की परवाह न करते हुए सेवाकार्य किया, इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी सराहा है।
शनिवार शाम करीब 6:30 बजे बरेली मोड़ स्थित एक होटल में कार्यक्रम का शुभारंभ वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने दीप जलाकर किया। कहा कि भाजपा सरकार ने नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले और निजी मेडिकल कॉलेज में सीटें बढ़ाईं। चिकित्सक को संवेदनशील होना चाहिए। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शरद अग्रवाल ने कहा कि कोविड संक्रमण काल में यूपी के चिकित्सकों ने सराहनीय कार्य किए हैं। मानव सेवा करते हुए देश के दो हजार चिकित्सकों की जान गई।
बताया कि आईएमए ने अब तक 1100 गांवों को गोद लेकर इलाज के साथ-साथ अन्य मूलभूत आवश्यकताओं को भी पूरा किया है। सुबह लेक्चर एवं साइंटिफिक कार्यक्रम के तहत वरिष्ठ चिकित्सक राजेंद्र प्रसाद और डॉ. सूर्यकांत ने टीबी में हो रही नई खोज एवं इलाज के बारे में जानकारी दी। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने नवजात शिशु के इलाज पर विचार व्यक्त किए। डॉ. शरद अग्रवाल, डॉ. प्रशांत ने डायबिटीज के इलाज व उसकी रोकथाम की नई तकनीक की जानकारी दी।
डॉ. अमरेश अग्रवाल, डॉ. दीप पंत, डॉ. पुनीत सोंधी ने दिल की बीमारियों के संबंध में बताया। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, डॉ. यूडी कपूर, डॉ. पीके अग्रवाल, सचिव डॉ. गौरव मिश्रा, डॉ. प्रदीप सिंह, डॉ. एमबी सक्सेना, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. एमएम पालीवाल, डॉ बीवी जिंदल, डॉ. परविंदर सिंह, डॉ. दीपा सक्सेना, डॉ. अनूप अग्रवाल, डॉ. अमिता जैन आदि मौजूद रहे। शाहजहांपुर के अध्यक्ष डॉ. विजय पाठक ने आभार जताया। इस दौरान आईएमए की वार्षिक पुस्तिका के साथ ही कई डॉक्टर की पुस्तकों का विमोचन किया गया। उल्लेखनीय कार्य करने वाले चिकित्सकों को सम्मानित किया गया।
वयस्कों के लिए जल्द आ सकती टीबी की वैक्सीन
केजीएमयू, लखनऊ के टीबी और चेस्ट विभाग के एचओडी तथा टीबी मुक्त भारत के जनरल टास्क फोर्स के नौ राज्यों के प्रमुख डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि टीबी होने की दर में 16 प्रतिशत तथा मृत्युदर में 18 प्रतिशत की कमी आई है। एमडीआर टीबी की नई दवा के शोध सफल होने पर तीन महीने तक ही दवा खाकर मरीज ठीक हो सकते हैं। बच्चों के जन्म के बाद सबसे पहले टीबी की वैक्सीन लगती है। इसका प्रभाव 18 वर्ष तक ही रहता है। अब वयस्कों के लिए वैक्सीन बनाने पर शोध चल रहा है।
अब जापानी तकनीक की मशीनों से हो रही जांचें
वाराणसी से आईं पैथोलॉजिस्ट डॉ. रितु गर्ग ने बताया कि खून की जांचों में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। जापानी टेक्नोलॉजी की मशीनों से अब जांच की जा रही है। जांच के दौरान खून में कई केमिकल मिलाए जाते हैं। इसकी मात्रा कभी-कभार गलती से अधिक पड़ जाती है। इससे रिपोर्ट सही नहीं आ पाती। जापानी तकनीक की मशीन की मदद से जांच रिपोर्ट सटीक आती है।