बदायूं

मिलावटखोरी : जांच में 72 फीसदी नमूने फेल फिर भी बंद नहीं हो रहा खेल

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बदायूं। जिले में अप्रैल से अक्तूबर तक खाद्य पदार्थों के लिए गए 203 नमूनों में से 145 जांच में फेल हो गए हैं। यानी करीब 72 फीसदी खाद्य पदार्थ खाने योग्य नहीं पाए गए। आरोपियों पर 9.45 लाख का जुर्माना लगाया गया है। इसके बावजूद मिलावट के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। दरअसल, मिलावट खोरों पर कार्रवाई यदाकदा ही हो पाती है।

अमूमन तो वे पकड़े ही नहीं जाते, अगर पकड़े भी जाते हैं तो नमूना भरने से लेकर जुर्माने तय होने तक की प्रक्रिया में ही अच्छा खासा समय लग जाता है। जुर्माना भी मिलावट करके कमाए गए मुनाफे के सामने कोई खास नहीं होता। लिहाजा मिलावटखोरों के हौसले बुलंद रहते हैं।

खाद्य एवं औषधि विभाग की सर्वाधिक सक्रियता त्योहारों के आसपास ही रहती है। बाकी दिनों में चेकिंग की सिर्फ औपचारिकता ही निभाई जाती है। यही वजह है कि मिलावट का धंधा करने वाले काबू में नही आ रहे। दरअसल कार्रवाई के नाम पर इन पर केवल जुर्माना डाला जाता है। जब तक जुर्माना तय होता है तब तक मिलावटखोर उससे चार गुना मुनाफा कमा लेते हैं।

नियम यह है कि यदि खाद्य पदार्थ का नमूना फेल हो जाता है, तो उसके विक्रेता, निर्माता प्रतिष्ठान को नोटिस जारी किया जाता है। इसमें कहा जाता है कि अगर वह केंद्रीय प्रयोगशाला में उस जांच रिपोर्ट को चैलेंज करना चाहता है तो अपील करे। अगर वह अपील करता है तो नमूना फिर से जांच के लिए लैब में भेज दिया जाता है। इसके लिए निर्धारित फीस संबंधित व्यक्ति को ही देनी पड़ती है।

अपील न करने पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा 30 दिन का समय नोटिस का जवाब देने के लिए दिया जाता है। अगर 30 दिन में भी दुकानदार कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है तो रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामला न्यायालय में चलता है, लेकिन निर्णय आने में कई साल लग जाते हैं। केवल एडीएम कोर्ट से जुर्माना लगाकर कार्रवाई कराई जाती रही है। ऐसे में अगर किसी मिलावटखोर का सैंपल भरा जाता है तो वह भी समझ लेता है कि अधिक से अधिक जुर्माना ही हो सकता है।

61 दुकानों से लिए गए थे 203 सैंपल

खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम ने अप्रैल से अक्तूबर तक 61 दुकानों से 203 नमूने विभिन्न खाद्य सामग्रियों के लिए थे। सभी सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। विभाग के अनुसार अब तक आई जांच रिपोर्ट में 145 सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें दुकानदारों पर 9.45 लाख का जुर्माना लगाया गया है। विभाग का दावा है कि सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद 30 दिन का समय दुकानदार को दिया जाता है। अगर जवाब नहीं मिलता है तो रिपोर्ट दर्ज करा दी जाती है लेकिन अप्रैल से अब तक किसी मिलावटखोर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।

इन पर लगा जुर्माना

करीब दो महीने पहले मुंशी पन्ना मसाला उद्योग एटा के गर्म मसाले का नमूना लिया गया था। इस मामले में 15 हजार का जुर्माना लगाया गया है। इसी उद्योग का मिर्च पाउडर और हल्दी पाउडर का सैंपल फेल होने पर 30 हजार का जुर्माना लगाया गया है। आरके ट्रेडर्स परसाखेड़ा बरेली की नमकीन का सैंपल भी जांच में फेल हुआ। इस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। आगरा की दूध फैक्टरी के उत्पाद का नमूना फेल होने पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। शहर से लेकर देहात तक करीब 50 नमूने ऐसे हैं, जिनमें 10 हजार से ऊपर का जुर्माना लगाया गया है। बाकी में 10 हजार से कम का जुर्माना लगाया गया है।

स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है मिलावट

रसायन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से शरीर के हर अंग को नुकसान हो सकता है। यह इस पर भी निर्भर करता है कि रसायन किस तरह का है। चिली सॉस में खट्टा करने से लेकर कई रसायनों का प्रयोग मिलावटखोर करते हैं। इसके लगातार सेवन से लिवर, दिल और किडनी पर भी असर होता है। इसका असर त्वचा पर भी पड़ता है, जिससे एग्जिमा, सोरायसिस आदि रोग होने लगते हैं। यदि लंबे समय तक इसका प्रयोग किया जाए तो हार्ट, किडनी फेल और कैंसर जैसी बीमारियां भी सामने आ सकती हैं। डॉ. नितिन सिंह, जिला अस्पताल


वर्जन

चालू वित्तीय वर्ष में भरे गए 203 सैंपलों में से 145 सैंपल फेल हुए हैं। इनका मामला एडीएम कोर्ट में चला और 9.45 लाख का जुर्माना 61 दुकानदारों पर लगाया गया है। अभी न्यायालय में तीन सौ से अधिक मुकदमे लंबित है। मिलावटखोरों पर लगातार कार्रवाई कराई जा रही हैं। – सीएल यादव सहायक आयुक्त द्वितीय खाद्य एवं औषधि विभाग


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