Pilibhit News: अफसरों को डर… कहीं सीएम के सामने न फूट जाए बाघ-तेंदुए से दहशतजदा ग्रामीणों का गुस्सा
पीलीभीत। टाइगर रिजर्व में बाघों-तेंदुओं की संख्या बढ़ने से जहां वन्यजीव प्रेमी और अधिकारी खुश हैं, वहीं इनके जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्र में आकर लोगों को मारने की घटनाओं से ग्रामीणों में आक्रोश है। माला रेंज के गांवों में कई दिनों से बाघ की मौजूदगी और वनाधिकारियों की लापरवाही से माहौल काफी गर्म है। ऐसे में शुक्रवार को मुख्यमंत्री के यहां आने पर कहीं ग्रामीणों का गुस्सा उनके सामने न फूट पड़े, इसकी अफसरों को चिंता सता रही है।
टाइगर रिजर्व में इस समय बाघों की संख्या करीब 71 बताई जा रही है। इसके अलावा अन्य वन्यजीवों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि होने से जंगल का एरिया अब बाघों के लिए कम पड़ने लगा है। यही कारण है कि आए दिन बाघ जंगल से बाहर आ जाते हैं। बीते कई दिनों से बांसखेडा और मथना के पास बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीणों का चैन छीन लिया है।
गांव बांसखेड़ा में बाघ आम के बाग में सात दिन तक डेरा जमाए रहा। उसे पकड़ने के प्रयास भी किए गए, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई। लिहाजा वन विभाग के अधिकारियों ने रेस्क्यू अभियान बीच में ही छोड़ दिया। इससे ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ग्रामीण अफसरों के सामने ही बाघ के जाल के नीचे से निकलकर भाग जाने को अफसरों की ही कारस्तानी बता रहे हैं।
उधर, गजरौला और पूरनपुर क्षेत्र में भी बाघ और तेंदुए की चहलकदमी बनी हुई है। कई बार कहने के बाद भी वन विभाग ने यहां कोई कार्रवाई नहीं की है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है। एक दिन पहले वन राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार के आने की भनक लगने पर ग्रामीणों ने उनके घेराव का एलान कर पीलीभीत-माधोटांडा रोड पर जाम भी लगा दिया था। तब वन राज्यमंत्री को रास्ता बदलना पड़ा था।
सितंबर में 10 दिन के भीतर बाघ ने दो लोगों की जान ले ली थी। इससे ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति खासा आक्रोश है। ऐसे में मुख्यमंत्री के शुक्रवार को यहां मुस्तफाबाद गेस्ट हाउस आने पर जंगल से सटे गांवों के लोगों की नाराजगी सामने आने का अफसरों को डर सता रहा है। देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री बाघ और तेंदुओं के आए दिन जंगल से बाहर निकलने और मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं का संज्ञान लेंगे, या फिर सब कुछ अच्छा बताकर अफसर अपनी लापरवाही छिपाने में कामयाब हो जाएंगे।
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पहली बार टाइगर रिजर्व में होगा वन्यजीव सप्ताह का समापन
एक अक्तूबर से सात अक्तूबर तक मनाए जा रहे वन्यजीव सप्ताह का समापन अब तक लखनऊ में ही होता रहा है। इस बार पहली दफा टाइगर रिजर्व को समापन समारोह के आयोजन की जिम्मेदारी दी गई है। छह अक्तूबर को समापन पर मुस्तफाबाद गेस्टहाउस परिसर में कार्यक्रम रखा गया है। मुख्यमंत्री इस समापन समारोह में ही शिरकत करने आ रहे हैं। इसमें देश के कई वन्यजीव विशेषज्ञ और अधिकारी भी जुटेंगे।