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Bareilly News: 80,000 भवन स्वामी बढ़े, आएंगे टैक्स के दायरे में

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बरेली। तीन वर्ष से 80 वार्डों में चल रहा जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) सर्वे पूरा हो गया है। सर्वे में 80,000 नए भवन सामने आए हैं। यानी नगर निगम में 80,000 नए करदाता बढ़ गए। इन पर टैक्स का बोझ जरूर बढ़ेगा। अभी तक करदाताओं की संख्या 1.45 लाख थी। अब यह आंकड़ा 2.25 लाख हो गया है। सर्वे रिपोर्ट के बाद कई हजार उपभोक्ताओं का टैक्स रिवाइज भी होगा। टैक्स वसूली का लक्ष्य भी नए सिरे से तय होगा। इससे नगर निगम की आमदनी भी करीब 40 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है।

जीआईएस सर्वे शासन स्तर से शुरू हुआ था। इसमें सेटेलाइट इमेजिंग के अलावा डोर-टू-डोर सर्वे किया जा रहा था। इसमें आवासीय और व्यावसायिक भवनों की संख्या का आंकड़ा अलग-अलग निकाला गया। इसके अलावा निर्माणाधीन भवनों और खाली प्लॉटों के आंकड़े को अलग से शामिल किया गया। सर्वे में यह भी निकलकर आया कि कुछ करदाताओं ने तीन मंजिला भवन बना लिया है, मगर कर एक मंजिला का ही दे रहे हैं। कुछ ने मकान 100 गज से बढ़कर 200 गज में बना लिया है, लेकिन टैक्स नहीं बढ़ाया गया। अब इनका टैक्स रिवाइज किया जाएगा।

30 करोड़ तक बढ़ जाएंगी निगम की आय

कई वर्ष पहले के मकान अब बंगला बन गए हैं। उनके सामने निकली सिंगल सड़कें अब डबल लेन हाे गई हैं। अब उन्हें भी उसी दायरे में लाकर टैक्स बढ़ाया जाएगा। अपर नगर आयुक्त सुनील कुमार यादव ने बताया कि जीआईएस सर्वे पूरा हो गया है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। अभी डेढ़ लाख घरों से वसूली होती है तो शासन 67 करोड़ रुपये का लक्ष्य देता है। अब 85 हजार व्यावसायिक और आवासीय भवन बढ़ने से माना जा रहा है कि नगर निगम की आय करीब 30 करोड़ रुपये बढ़ जाएगी।

2003 में भी हुआ था सर्वे, नहीं मिली थी सही रिपोर्ट

नगर निगम ने वर्ष 2003 में भी रोल्टा कंपनी से जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) आधारित सर्वे कराया था। वह सही रिपोर्ट नहीं दे पाई थी। इसके बाद वर्ष 2011 में दूसरी कंपनी से सर्वे की बात हुई, लेकिन मामला बजट में अटक गया। वर्ष 2013 में फिर एक कंपनी से सर्वे के लिए संपर्क किया गया, मगर इस बार भी बजट का पेच फंस गया था। अब जाकर निगम सर्वे पूरा कराने में कामयाब रहा।

17 अंकों की होगी यूनिक आईडी

सर्वे के माध्यम से शहर के हर भवन को 17 अंकों की यूनिक प्रापर्टी आईडी जारी की जाएगी। इससे उस संपत्ति की पहचान की जा सकेगी। इससे नामांतरण और बकाया टैक्स वसूली में भी नगर निगम को मदद मिलेगी। संपत्तियों का ब्योरा विभागीय वेबसाइट पर भी देखा जा सकेगा। यूनिक आईडी में पहले दो अंक लोकल गवर्नमेंट डायरेक्टरी यानी एलजीडी के होंगे। तीन से पांच अंक तक स्थानीय निकाय का कोड होगा।

जीआईएस सर्वे रिपोर्ट

कुल भवनों की संख्या: 2.25 लाख

व्यावसायिक भवनों की संख्या: 45 से 50 हजार

आवासीय भवनों की संख्या: 1.75 लाख से 1.80 लाख

निर्माणाधीन भवनों की संख्या: 1,200

खाली प्लॉटों की संख्या: 12 हजार


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