Bareilly News: स्मार्ट मीटर की ऑटोमैटिक रीडिंग फेल…बुलना पड़ता है रीडर
बरेली। शहर में एक वर्ष के भीतर 300 से अधिक मीटर खराब होने पर बदले गए, लेकिन एक भी मीटर ऐसा नहीं है, जिसमें रीडिंग ऑटोमैटिक हो रही हो। इससे उपभोक्ता और अभियंता दोनों परेशान है। अभियंता मीटर रीडर को भेजकर रीडिंग कराते हैं तब बिल बन पाता है। मीटर रीडर नहीं पहुंचा तो उपभोक्ता को कॉल करके उसके आने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में स्मार्ट मीटर का क्या फायदा? यह सवाल उपभोक्ता उठा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर अभियंता बता रहे हैं कि साॅफ्टवेयर में फीडिंग न होने की वजह से रीडिंग का ऑटोमैटिक तरीका उन मीटरों में संचालित नहीं हो रहा है जो एक वर्ष की अवधि में लगाए गए हैं।
शहर में 2,10,000 उपभोक्ता हैं। इसमें विद्युत वितरण खंड प्रथम और चतुर्थ में 57,000 उपभोक्ताओं के घर और प्रतिष्ठान में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। जो स्मार्ट मीटर जल जाता है या फिर किसी वजह से खराब जाता है। उसकी जगह पर नया मीटर लगाया जाता है। मीटर लगाने का काम आउटसोर्स कंपनी कर रही है। कंपनी के स्तर से मीटर ठीक लगाया जा रहा है, लेकिन इसे बिलिंग सिस्टम से जोड़ने का काम मध्यांचल विद्युत वितरण निगम का है। बिलिंग सिस्टम में लगी निजी एजेंसी बदले जाने से दो समस्याएं सामने आईं। पहली बकाया पर बिजली आपूर्ति कटती है लेकिन बिल जमा होने के बाद ऑटोमैटिक तरीके से जुड़ती नहीं है। दूसरी समस्या खराब मीटर के स्थान पर बदले गए मीटर की रीडिंग न होने की है। विद्युत वितरण खंड चतुर्थ के अधिशासी अभियंता गौरव शुक्ला ने बताया कि ऐसे मामलों की बिलिंग न होने पर जानकारी मिल जाती है। जो उपभोक्ता बिलिंग से छूट जाते हैं, उनकी रीडिंग को मीटर रीडर भेजकर लिखवाते हैं और बिल बनवाते है।
मैं 5 अक्तूबर से बार-बार फोन कर रहा हूं, मीटर सिस्टम पर नहीं चढ़ सका, नतीजा बिलिंग नहीं हो रही है। मुझसे रीडिंग के लिए मीटर का फोटो मांगा गया है। मैं यही पूछ रहा हूं कि ऐसे स्मार्ट मीटर का क्या फायदा जिसमें रीडिंग के लिए भी परेशानी उठानी पड़े। – पीर बहोड़ा
6 जून की शिकायत के बाद स्मार्ट मीटर ठीक कर दिया गया, लेकिन बिलिंग में समस्या है। मीटर रीडर आता है। कई बार उनका मीटर यह कहकर छोड़ देता है कि आपका बिल ऑटोमैटिक सिस्टम से बनेगा। बिल जमा करने के लिए जो समय दिया गया सिस्टम ने उससे पहले ही बिजली काट दी। – महेश कुमार, करगैना
कोट- स्मार्ट मीटर का साॅफ्टवेयर अपडेट होना है। इस पर काम चल रहा है। जैसे ही सिस्टम ठीक होगा ऑटोमैटिक तरीके से पहले की तरह काम होने लगेंगे। जो भी परेशानी आती है, उसके बारे में मुख्यालय को अवगत करा दिया है। – विपुल जैन, अधिशासी अभियंता, परीक्षण खंड



