Bareilly News: मस्ती की पाठशाला में बच्चे सीख रहे शब्द ज्ञान
बरेली। उच्च प्राथमिक विद्यालय कांधरपुर में पिछले दस दिनों से बच्चे खूब मस्ती कर रहे हैं। यहां बच्चों को टीएलएम और एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग के जरिये पढ़ाया जा रहा है। निपुण भारत लक्ष्यों तक कक्षा एक से तीन के बच्चों की पहुंच आसान बनाने के लिए भी अलग और रोचक तरीके निकाले गए हैं। आम दिनों से अलग दिखने वाली यह पाठशाला किसी पिकनिक से कम नहीं है। आम दिनों की अपेक्षा विद्यार्थियों की उपस्थिति भी इस पाठशाला में काफी अधिक है।
स्कूल की प्रधानाध्यापक शबीना परवीन ने बताया कि इस तरह शिक्षण को मस्ती की पाठशाला नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि विद्यार्थी यहां खूब आनंद ले रहे हैं। यह कक्षाएं ओपन ग्राउंड में लगाई जाती हैं और सभी छात्र-छात्राएं समूह में शामिल होते हैं। क्लास में बच्चों को सिखाने के लिए देशभक्ति गीत और बच्चों से जुड़े फिल्मी गानों का प्रयोग किया जाता है।
यह तो सच है कि भगवान है.., बच्चे मन के सच्चे…, घूमरो-घूमरो.. आदि गानों की धुन पर बच्चे स्वर का ज्ञान सीखते हैं।
शिक्षिका ने बताया कि कक्षा एक से तीन के बच्चों को निपुण लक्ष्यों से जोड़ने में भी यह गाने अहम भूमिका निभाते हैं। गाने सुनकर बच्चे उन शब्दों को आसानी से याद कर लेते हैं, इससे उच्चारण का प्रयास करते हैं। एक बार गाना सुनने के दौरान अच्छा लगने वाला शब्द बच्चों को समझाया जाता है।
यह सिखाया जाता है कि शब्द किन अक्षरों से मिलकर बना है, उसमें कौन सी मात्राएं लगी हैं? बिना मात्रा के वही शब्द कैसे पढ़ा जा सकता है? इस तरह कक्षाएं आम कक्षाओं की अपेक्षा रोचक हो जाती हैं। बच्चे गाने की धुन पर व्यायाम और योग आदि भी सीखते हैं। इन कक्षाओं के दौरान 80-90 फीसदी बच्चे क्लास में उपस्थित रहते हैं।
कई बार बच्चों को शिक्षक की भूमिका निभाने को कहा जाता है, इसके जरिए बच्चे जो सीख चुके हैं वह उन्हें दूसरे बच्चों को सिखाना होता है। गणित की बुनियादी चीजें भी इस तरह से बेहतर सिखाई जा सकती हैं। इस तरह की अन्य गतिविधियां भी कक्षाओं में कराई जाती हैं।



