Bareilly News: फड़ लूटकर दिवाली मनाना चाहती थी चौकी पुलिस
बरेली। भमोरा के गांव आलमपुर जाफराबाद में किसान संतोष शर्मा की पुलिस की पिटाई से मौत के मामले में चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि नहर किनारे होने वाले जुए का चौकी पर महीना आता था। रात में जुआ होने पर पुलिस नये जुआरियों की तलाश में दबिश देने पहुंच गई। हालांकि, फड़ लूटकर दिवाली मनाने की तमन्ना अधूरी रह गई। अब निलंबन के साथ जेल भी जाना पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने बताया कि भट्ठे के पास बनी नहर की पुलिया पर कई महीनों से जुआ हो रहा था। वहां दूसरे गांवों व कस्बों से आकर जुआरी जुआ खेलते थे। गांव का ही एक व्यक्ति पुलिस के लिए दलाल का काम करता है और यहां से जुआ की रकम पुलिस को पहुंचाता था। पुलिस की सेटिंग से जो जुआ होता था वह दिन में ही होता था। दिवाली से पहले पुलिस को ऊपरी कमाई के जरिये की तलाश थी। इसके लिए सिपाही से दरोगा तक हाथ-पैर मार रहे थे।
इस बीच बुधवार को किसी ने नहर किनारे रात में जुआ होने की सूचना दी। पुलिस को लगा कि यहां ग्रामीण या नये जुआरी दांव लगाने आये होंगे जिन्हें पकड़कर बड़ा दांव खेला जा सकता है। अधिकारियों को बताकर जाने में रकम न पचा पाने का खतरा था। इसलिए मनमर्जी से दबिश दी गई।
हताश पुलिस पर ऐंठे संतोष तो पिटे
– बताया जा रहा है कि जब पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां से जुआरी भाग निकले। इससे पुलिस को दिवाली मनाने में खलल पड़ा तो पूरी टीम गुस्से से भर गई। पुलिस को यहीं पर संतोष मिल गए। पुलिस ने उनसे नए जुआरियों के नाम पूछने की कोशिश की ताकि उनके घरों पर दबिश देकर उगाही का रास्ता खुल सके। बताते हैं कि संतोष पुलिस पर ऐंठ गए कि उन्हें न तो जुआ से और न ही जुआरियों से कोई मतलब है। इस पर गुस्साए दरोगा सिपाहियों ने उन्हें गिराकर पीटना शुरू कर दिया।
दलाल की प्राइवेट एंबुलेंस से पहुंची थी पुलिस
– बदायूं रोड पर कई प्राइवेट अस्पताल हैं। यहां हाईवे पर अक्सर एक्सीडेंट होते रहते हैं। इसके साथ ही गांवों में विवादों में लोग घायल होते रहते हैं। इन्हें अस्पतालों में पहुंचाने पर संबंधित एंबुलेंस चालकों को तगड़ा कमीशन मिलता है। इसमें पुलिस की भी भूमिका होती है। पुलिस अपना ख्याल रखने वाले एंबुलेंस चालकों को अपने यहां खड़ा होने देती है और इस तरह पुलिस के पास आने वाले हर केस में एंबुलेंस अच्छे पैसे में तय हो जाती है। चौकी पर थाने की तरह जीप नहीं होती, इसलिए इस तरह की एंबुलेंस कई बार पुलिसकर्मी अपने वाहन के रूप में प्रयोग कर लेते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक एंबुलेंस ड्राइवर विजय भी चौकी पुलिस का दुलारा था। पुलिस जब छापा मारने गई तो विजय की एंबुलेंस लेकर गई। इसलिए पीड़ित पक्ष ने विजय को भी नामजद करा दिया।



